मंगलवार, 21 फ़रवरी 2017

बरफ का गोला


बाल कहानी
                              बरफ का गोला 
                                                
                                                       पवित्रा अग्रवाल
 
         स्कूल के गेट से बाहर निकलते ही रंजीता की नजर ठेले पर बिक रहे बर्फ के रंग बिरंगे गोलों पर पड़ी ।गर्मी से बेहाल रंजीता का दिल भी उसे खाने को मचल उठा। उसने अपनी सहेली विपमा से कहा देख लड़कियाँ कैसे चुसकी ले ले कर बर्फ के गोले खा रही हैं ,चल आज अपन भी खाते हैं।'
 "ना बाबा मैं इनको नहीं खाने वाली ।मम्मी ने मुझे कभी नहीं खाने दिया पर एक बार ऐसे ही स्कूल से निकलते हुए मैं ने भी खूब चुस्की ले ले कर इसे खाया था और मैं बीमार पड़ गई थी। कई दिन मुँह से आवाज नहीं निकली थी. तब से मैं ने तोबा करली कि इसे कभी नहीं खाना है।'
 "तुम देखो रोज कितने बच्चे इसे खाते हैं और वास्तव में सबसे ज्यादा भीड़ भी इसी के ठेले पर रहती है,वह तो बीमार नहीं पड़ते । तू किसी और वजह से बीमार पड़ी होगी ।'
 "रंजीता सोचने की कई बातें हैं, इसमें से कितने बीमार पड़ते हैं हमें कैसे पता लगेगा ? गला खराब होना, खाँसी जुकाम होना तो अब आम बीमारी बन गई है। तकलीफ हुई और दवा खाली लेकिन हम में से बहुत से यह जानने की कोशिश नहीं करते कि इस के पीछे कहीं हमारे खान पान की आदतें तो नहीं हैं। जब मैं बीमार हुई तो मम्मी डाक्टर के ले गई थीं। डाक्टर ने सब से पहले यही पूछा कि तुमने आइसक्रीम, बाहर का जूस आदि पिया था क्या ?'
 "मुझसे पहले मम्मी ने कहा "हमारे बच्चे बाहर इस तरह की चीजें नहीं खाते पीते हैं' तब मुझे ध्यान आया कि मैं ने कल बर्फ का गोला खाया था।
 "फिर तूने मम्मी को बताया ?'
 "हाँ मैं ने डाक्टर साहब के सामने ही यह बात स्वीकार करली ।मम्मी को बुरा तो लगा पर वह मेरे सच बोलने पर खुश भी हुई ।'
 "बस आपकी इस तकलीफ का कारण यही बर्फ का गोला है' डाक्टर अंकल ने कहा था
 "पर वहाँ तो बहुत बच्चे इसे खाते हैं ।'
 "उनको भी कुछ हुआ या नहीं आपको कैसे पता चलेगा ।.. जो भी माता पिता अपने बच्चों को जुकाम, खॉसी, गले में दर्द  की तकलीफ ले कर यहाँ आते हैं मैं सब से पहले यही प्रश्न पूछता हूँ और अधिकतर मामलों में रोड साइड स्टालों से इस तरह की चीज खाना उनके इंफैक्शन का कारण होता है।'
 "वह लोग सफाई से नहीं बनाते इस लिए ?'
 "हाँ वह भी एक कारण हो सकता है पर तुम लोगों को इस सब से बचना चाहिए खास कर ठण्डी चीजों से जैसे बरफ के गोले, आइसक्रीम आदि में यह खतरा ज्यादा होता है ?
 मैं ने पूछा था -"ऐसा क्यों डाक्टर अंकल ?'
  "बेटा आपके घर में पानी साफ करने के लिए कोई प्यूरीफायर  है ?'
 "हाँ है और हम तो स्कूल भी अपना पानी ले कर जाते हैं।'
 " ये बर्फ का गोला बेचने वालों की बर्फ साघारण पानी की होती है ,उसमें भी वह रंग बिरंगे सिरप डाल कर उसे और हानिकारक बना देते हैं। ये सिरप अपने रंगों के कारण सब को अपनी तरफ आकर्षित तो करते हैं पर यही बीमारी की जड़ हैं। ये सब से सस्ते वाले रंगों का  प्रयोग करते हैं । किसी पर यह जल्दी ही असर दिखाते हैं किसी पर धीरे धीरे केंन्सर आदि बीमारी के रूप में गम्भीर असर दिखाते हैं ।'
 "बस रंजीता उस दिन के बाद से मैं इन ठेलों आदि से कुछ नहीं खाती ।'
 "धन्यवाद विपमा आगे से मैं भी इन बातों का घ्यान रखूँगी ।'
        
ईमेल --
agarwalpavitra78@gmail.com
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-पवित्रा अग्रवाल
 

1 टिप्पणी:

  1. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ... शानदार पोस्ट .... Nice article with awesome depiction!! :) :)

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