शुक्रवार, 6 जनवरी 2017

मम्मी ने कहा था

बाल कहानी
                   
मम्मी ने कहा था    
                                                          पवित्रा अग्रवाल


     दिसंबर की छुट्टियां   शुरू होते ही वरुण ने  ऊँचा स्टूल लगा कर अलमारी पर से कुछ पतंगें और चरक,  माँजा  नीचे उतार लिया ।
    माँ ने कहा "बेटा वरुण तुमने इतनी सारी पंतगें क्यों जमा की हुई हैं... जितनी जरूरत हो उतनी ही लाया  करो।...पड़े पड़े खराब भी होती हैं।'
 वरुण खुश हो कर बोला -- "अरे मम्मी इनमें से एक भी मेरी खरीदी हुई नहीं हैं, सब कट कर आई हुई  पतंगें हैं। '
 "तुम से मना किया था  न, फिर भी तुम पतंगें लूटते हो ? '
 "अरे माँ अपनी छत इतनी बड़ी है कि पतंगें अपने आप आ कर गिर जाती हैं।...वही पतंगें मैं जमा कर  लेता हूँ'
 " इनमें से कुछ पतंगें तो  बहुत खराब हो रही हैं पर तूने उनको भी संभाल कर क्यों रखा हुआ है ?'
 'फिर इनका क्या करूँ माँ ?'
 "पतंग के दिनों में बहुत से गरीब बच्चे अपनी जान की परवाह न करते हुए पतंग लूटने के लिए सड़कों पर भागते फिरते हैं,यह पतंगें उन को दी जा सकती थीं  ।'
 "हाँ माँ आपकी सलाह तो अच्छी है पर पतंगें देख कर उन्हें सहेज कर रखने या खुद ही उड़ाने का  लालच  आ जाता है।'

     एक दिन वरूण दोस्तों के साथ क्रिकेट खेल कर लौटा था ,उसकी नजर अपने बगीचे में गई। उसने  देखा कि  बगीचे में एक लड़का घुसा हुआ था और  उसने हाथ में एक लोहे की छड़ उठा रखी थी ,उस  से पतंग निकालने की वह कोशिश कर रहा था।
   वरूण एक दम से चिल्लाया -- "अरे यह क्या कर रहे हो ?'
 लड़के ने डर के मारे लोहे की छड़ वहीं फेंक दी और रोने लगा - ' भैया मैं चोर नहीं हूँ ।अभी एक पतंग कट कर यहाँ लटक गई थी, उसको निकालने की कोशिश कर रहा था।'
     "तुम डरो नहीं, मैं तुम्हें चोर नहीं समझ रहा पर क्या तुम्हें मालुम है कि पेड़ के पास से करेंट के तार जा रहे हैं... पतंग निकालने के चक्कर में यदि यह छड़ तारों से छू गई तो तुम अभी यहीं करेंट लगने से मर  जाओगे।दो चार रुपए की पतंग के लिए तुम अपनी जान खतरे में क्यों डाल रहे हो ? '
    'हाँ भैया गलती हो गई ...मैं ने यह तो सोचा ही नहीं था पर मैं अभी मरना नहीं चाहता। मेरे छोटे भाई को पोलियो है, आज वह पतंग के लिए जिद्द कर रहा था ...मैं ने सोचा उसके लिए पतंग ले जाऊँगा तो  वह खुश हो जाएगा ।'
 "तुम्हारे घर में कौन कौन है ?'
 "माँ है ,बापू हैं,एक छोटा भाई है । माँ दो घरों का खाना बनाती है...बापू केले की बंडी लगाते हैं।पर  उनको  शराब पीने की लत है ,वह घर में खर्च को कुछ नहीं देते और हम लोगों को बहुत मारते पीटते  हैं।'
 "तुम स्कूल जाते हो ? '
 "हाँ ,पास के सरकारी स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ता हूँ।पहले मैं खाली समय में एक दुकान में काम भी करता था पर जब से सरकार ने बच्चों से काम कराने पर रोक लगाई है  तब से मेरी नौकरी चली  गई है।.. फिर भी चुपके से दो घरों में कार साफ करने का काम अभी भी कर रहा हूँ।'


 "ठीक है मैं पापा से बात करता हूँ, हमारी कार गैराज में रहती हैं किसी को पता भी नहीं चलेगा कि   उसकी सफाई कौन करता है। तुम एक दो दिन बाद आना ।'
 "भैया आप तो बहुत अच्छे हो, अब मैं चलूँ.... दो दिन बाद आऊँगा ।'
  तुम्हारा नाम क्या है ?'
 "शंकर '
 वरुण को अचानक मम्मी की एक बात याद आ गई। उसने कहा"--" शंकर तुम दो मिनट यहीं रूको ,मैं अभी आता हूँ।'
वरूण ने अन्दर से पाँच छह पतंगे और डोर लाकर उसे देते हुए कहा --" लो यह अपने भाई को दे  देना  पर उस से कहना वह इन्हें सड़क पर नहीं, किसी सुरक्षित जगह से उड़ाए ।'
 पतंगें पाकर शंकर के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई।
 खिड़की में से मम्मी यह सब देख कर बहुत खुश हो रही थीं।

 
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