बुधवार, 17 अगस्त 2016

छोटी सी घटना

बाल कहानी                        छोटी सी घटना         
                                                   
                                                पवित्रा अग्रवाल
 
     शाम हो गई थी। अपना होम वर्क समाप्त करके राहुल घर से बाहर खेलने के लिए निकला ही था कि कोने के घर वाले अंकल उसे मिल गए। उन्होंने पूछा बेटे आपके पापा घर पर हैं ?'
 "हाँ अंकल, आइए पापा घर पर ही हैं' कहकर राहुल ने उन्हें ड्राइंग रूम में बिठाया और पापा को उनके आने की सूचना दी।
  पापा के आते ही नमस्ते-नमस्ते के आदान-प्रदान के बाद अंकल ने पापा से पूछा "पूजा आपकी बेटी है क्या ?'
 "हाँ पूजा मेरी ही बेटी है। क्या किया उसने ? कोई शरारत की है क्या ?' पापा ने पूछा।
 "अजी साहब क्या संस्कार दिए हैं आपने अपनी बेटी को..
 .पापा ने बीच में ही बात काट कर कहा-- "मगर किया क्या उसने ? उससे कोई गलती हो गई ?'
 अंकल बोले-" नहीं साहब गलती कैसी ? बहुत ही अच्छी बेटी है आपकी.... अभी तीन-चार दिन पहले की बात है वह मेरे घर आई और आते ही मुझ से सीधा सवाल किया, "अंकल आप सिगरेट पीते हैं ?'
       मैं तो सकपका गया कि छोटी सी बच्ची मुझसे यह प्रश्न क्यों पूछ रही है। मैंने हाँ में सिर हिलाया। तो उसने दस रुपये का एक नोट मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा "आपके घर के सामने पड़ी यह सिगरेट की खाली डिब्बी मैंने खेलने के लिए उठाई थी। इस डिब्बी के अंदर दस रुपये का यह नोट निकला है, आपका ही होगा।' कहकर उसने वह नोट मेज पर रख दिया। मैंने उसे वह रुपये देने की बहुत कोशिश की और कहा - "इन रुपयों से तुम टॉफ़ी खरीद कर खा लेना...लेकिन उसने नहीं लिए। तब मैंने उससे उसका व पिता का नाम पूछा तो ज्ञात हुआ वह आपकी बेटी है। सात-आठ वर्ष की छोटी सी बच्ची इतने अच्छे संस्कार, सच मैं उससे बहुत प्रभावित हुआ हूँ। उसे मैं अपने क्लब की तरफ से पुरस्कार दिलवाना चाहता हूँ।'
         पापा को यह बात पता नहीं थी, शायद मम्मी को भी नहीं मालूम थी। यहाँ तक कि मुझे भी उस ने नहीं बताया था। पूजा को बुलाकर पूछा तो उसने स्वीकृति में गर्दन हिला दी।
 वो अंकल यह जानकर और भी प्रभावित हुए कि पूजा के लिए ये घटना इतनी साधारण थी कि इसका जिक्र उसने घर में भी नहीं किया। पापा को बहुत बधाई देकर पूजा के सिर पर स्नेह से हाथ फेरते अंकल चले गए।
    राहुल भी अपनी छोटी बहन से बहुत प्रभावित हुआ क्यों कि मम्मी से तो अक्सर वह जिद्द करके कुछ न कुछ खरीदने के लिए पैसे माँगती रहती है। लेकिन जो रुपये उसे सड़क पर पड़े मिले उनको अंदाजा लगा कर उसके मालिक तक पहुँचा आई। उसे जरा भी लालच नहीं आया। वह रख भी लेती तो कोई उसे चोर नहीं कहता । साथ ही राहुल को अपने ऊपर ग्लानि भी हुई कि बाहर की छोड़ो, घर में भी इधर-उधर रखे पैसे उसे मिलते हैं तो वह माँ को बिना बताए उठा लेता है और उन पैसों से टॉफ़ी, बिस्कुट आदि खरीद कर खा लेता है।
 वह सोच रहा था मैं तो पूजा से दो वर्ष बड़ा हूँ और जब-तब अपने बड़े होने का रौब उस पर जमाता रहता हूँ। हम दोनों के माता-पिता एक हैं लेकिन हम दोनों की नीयत में कितना अंतर है ?
 पूजा के साथ घटी इस छोटी सी घटना से राहुल को बहुत प्रेरणा मिली। उसने निश्चय किया कि भविष्य में वह भी इतना ही ईमानदार बनने की कोशिश करेगा। उसे पूजा पर बहुत प्यार आ रहा था। उसने अपनी बहन की बड़े प्यार से पीठ थपथपाई।

        
    ईमेल -agarwalpavitra78@gmail.com