गुरुवार, 14 अप्रैल 2016

पानी क्या ड्रम पी गया

बाल कहानी                              
             पानी क्या ड्रम पी गया ?
 
                                           पवित्रा अग्रवाल

                                                                                                                                                                                                                                      ट्यूशन   सुबह सुबह ट्यूशन पढ़ कर अनूप घर आया तो मम्मी बहुत गुस्से में थीं .बैग रखते हुए उसने पूछा “मम्मी आज सुबह सुबह इतने गुस्से में क्यों हो ?.पापा तो बाहर गए हुए हैं ,तो क्या  दादी से झगडा हुआ है ?” 
‘नहीं .’
‘तब तो फिर जरुर ऊपर वाली आंटी से हुआ होगा पर क्यों मम्मी ?
“क्यों कि तेरी मम्मी को झगडा करने की आदत है ‘
‘मैं ने ऐसा तो नहीं कहा ,...बताओ न मम्मी आप इतने गुस्से में क्यों हैं ?’
    “गुस्सा नहीं आएगा तो और क्या होगा ? किराये का मकान है, इस में बोरवैल भी नहीं है . अपना मकान होता तो कब का बोरिंग करा लेती .शहर में पानी की कितनी किल्लत है सब जानते हैं ...एक दिन छोड़ कर पानी आता है,जब मैं उठी तो ड्रम खाली पड़ा था .मैंने सोचा आज पानी नहीं आया होगा पर मंदिर से आकर दादी ने बताया कि उनके मंदिर जाते समय  ड्रम भरने वाला था पर इस समय वह एकदम खाली है. आखिर पानी कहाँ गया ? ऊपर वालों के सिवाय और कौन ले सकता है ?”
‘मम्मी वह लोग तो मोटर लगा कर पानी चढाते हैं ,क्या आपने मोटर की आवाज सुनी थी ?”
‘नहीं मोटर की आवाज तो मैं ने नहीं सुनी ’
‘तो आप क्या समझती हैं... आंटी आपके ड्रम में से बाल्टी भर भर कर ऊपर पानी ले गई होंगी ?’
‘यह सब मैं  नहीं जानती पर कोई तो पानी लेकर गया है ?’
       तभी ऊपर वाली आंटी आगई – ‘अनूप आप की मम्मी तो लड़ने के बहाने ढूँढती रहती हैं ,ड्रम खाली देख कर इन्होंने नीचे से चिल्ला चिल्ला कर लड़ना शुरू कर दिया ...हमने तो आज एक बाल्टी पानी भी नहीं भरा है .सुबह सुबह इतना अच्छा प्रेशर होता है कि बिना मोटर चलाये ही  हमारा ड्रम भर सकता है पर पानी आते ही आप की दादी नल खोल लेती हैं तो पानी ऊपर नहीं चढ़ पाता और बाद में हमें मोटर से पानी चढ़ाना पड़ता है और कभी करेंट चला जाये तो बहुत मुश्किल होती है .लेकिन रोज रोज की किटकिट से बचने के लिए हमने कुछ भी कहना छोड़ दिया है .अब भी इनको चैन नहीं है ,अब तो हम पर पानी की चोरी का इल्जाम भी लगा रही हैं . कुछ दिन चैन से रह लेने दो , हम जल्दी ही दूसरे मकान में चले जायेंगे .’
   “मैं इल्जाम नहीं लगा रही .अनूप अब तू ही बता या तो दादी झूठ बोल रही हैं या फिर पानी को ड्रम पी गया ”
“एक मिनट मम्मी ,जब आप कमरे से बाहर आई  तो पाइप ड्रम के अन्दर था या बाहर पड़ा था ?”
“पाइप तो ड्रम के अन्दर ही था ”
“नल खुला था या बंद था ?”
'खुला था '.
'नल में पानी आरहा था या जा चुका था ?'
'पानी तो जा चुका था .'
तब तो बात साफ है कि ड्रम का पानी किसी ने नहीं लिया है .
तब पानी गया कहाँ ,क्या ड्रम पी गया ?
पानी ड्रम ने नहीं नल ने पिया है
अनूप यह मजाक का समय नहीं है
मै मजाक नहीं कर रहा ,सच बोल रहा हूँ मम्मी .
'मैंने भी यही कहा था कि पानी नल में वापस चला गया है पर आपकी मम्मी तो कुछ सुनने को तैयार ही नहीं थीं”
मम्मी अभी ड्रम में कितना पानी बचा है ?
चौथाई ड्रम पानी है, दो दिन कैसे काम चलेगा ?
“मम्मी ड्रम में पाइप जहाँ तक डूबा था उतना पानी वापस नल में चला गया .और जो पानी पाइप से नीचे था वह बच गया ...और दादी मंदिर जाने से पहले आप नल बंद कर देतीं तो हमारा ड्रम खाली नहीं होता और ऊपर वाली आंटी को भी कुछ पानी मिल जाता . ‘सॉरी आंटी .मम्मी की तरफ से मैं आप से माफ़ी मांगता हूँ’ ....मम्मी आप भी थोडा सब्र से काम लिया करो .आगे से ध्यान रखो ड्रम में पाइप थोडा ही डूबने दो ताकि नल जाने पर पानी वापस न लौटे . दूसरी बात ड्रम भरते ही पाइप हटा कर नल बंद कर देना चाहिए  वरना आप के उठने तक पानी नाली में व्यर्थ ही बहता रहेगा और यह पानी की भयंकर बर्बादी है.जो किसी हालत में नहीं होनी चाहिए  और आंटी भी तो हमारी तरह किरायेदार हैं , पानी उन्हें भी तो मिलना  चाहिए .”
                                                
( यह कहानी नवम्बर 15 की  नंदन पत्रिका में छपी थी )
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