शनिवार, 12 सितंबर 2015

एक कहानी का कमाल

बाल कहानी
                              
         

    एक कहानी का कमाल

                                                                   पवित्रा अग्रवाल
 
 "रक्षा तू तो पन्द्रह दिन के लिए अपने दादा,दादी के पास  भोपाल जाने वाली थी,नहीं गई क्या ?''
 "वर्षा मैं जाने वाली ही नहीं थी ट्रेन में मम्मी के साथ चढ़ भी गई थी पर ...
 "पर क्या ?''
 "कुछ नहीं वर्षा अचानक ट्रेन में मम्मी की तबियत खराब हो गई थी।''
 "मम्मी को क्या हों गया था ? अब वह कैसी हैं ?''
 " हार्ट अटैक आया था,हमें आगरा उतरना पड़ा पर अब वह ठीक हैं।''
 "पर ट्रेन में तू तो मम्मी के साथ अकेली थी, तुझे कैसे पता चला कि हार्ट अटैक है फिर तूने क्या किया ?''
 " दिल्ली से ट्रेन में बैठने के कुछ देर बाद ही मम्मी के सीने में दर्द उठा था ।ए.सी. में भी वह पसीने में नहा गई थीं।''
 " फिर ?''
 " फिर क्या ..मैं ने भाग कर अटेंडेन्ट से कहा कि जल्दी से टी टी से कहो कि बर्थ नंबर छह पर डाक्टर की जरूरत है।साथ ही मैं ने कम्पार्टमेंन्ट में भी जोर जोर से पुकारना शुरू कर दिया कि क्या आप लोगों में से कोई डाक्टर है ?...यदि कोई डाक्टर है तो कृप्या मेरी मदद करें, मेरी माँ बहुत बीमार है।''
 तभी केबिन का पर्दा हटा कर एक सज्जन बाहर आए और बोले बेटा मैं डाक्टर हूँ, कहाँ है तुम्हारी माँ ?''
  "माँ को देख कर उन्होंने सब से पहले एक गोली निकाल कर माँ की जीभ के नीचे रख दी  फिर उनका ब्लडप्रेशर देखा , स्टेथस्कोप से चेक किया  और भी  जो हो सकता था किया फिर मुझ से बोले,--

  "बेटा तुम्हारी  समझदारी की  वजह से तुम्हारी मां  का  समय रहते  प्राथमिक उपचार कर पाया हूँ पर  यह हार्ट अटैक है . आगरा का  स्टेशन आने वाला है। …  आगरा में तुम्हारा कोई परिचित रहता  है क्या ?''
 "  मैं ने कहा "हाँ अंकल यहाँ मेरे मामा जी रहते हैं और वह डाक्टर हैं।''
 "यह तो बहुत अच्छी बात है तुम उन्हें फोन कर के मम्मी की हालत के बारे बताओं फिर मुझ से भी बात करा दो '
डाक्टर अंकल  ने मामा जी से बात करने के बाद मुझ से  कहा --
 "बेटा तुम्हारे मामा जी  एम्बुलेन्स ले कर स्टेशन आ रहे हैं....तुम्हारे साथ कोई और भी है?''
 "नहीं अंकल ''
 "कोई बात नहीं, तुम हिम्मत रखो बेटा। मैं टी टी से कह कर आगरा के स्टेशन पर भी डाक्टर का इंतजाम करने को कहता हूँ ।तब तक तुम्हारे मामा भी आ जाएंगे।''
 तब तक टी टी अंकल  भी आ गऐ थे ।
 समय पर डाक्टरी मदद मिल गई थी ।मम्मी अब ठीक हैं।दस दिन आगरा रहना पड़ा था।''
 "तू तो बड़ी हिम्मत वाली हैं ...तेरी जगह मैं होती तो मेरे तो हाथ पाँव फूल जाते और मैं मम्मी के पास बैठ कर बस रोना शुरू कर देती।''
 "शायद मै भी ऐसा ही करती पर यह कमाल तो एक कहानी का है। अभी कुछ दिन पहले ही  अपनी  बुआ के "बाल कहानी संग्रह' में एक कहानी पढ़ी थी जिसमें एक किशोर उम्र का लड़का अपने दादा - दादी  के साथ ट्रेन में कहीं जा रहा था रास्ते में उसके दादा जी को दिल का दौरा पड़ा था पर उस लड़के  ने न टी टी को बताया, न मदद के लिए किसी को पुकारा बस दादी के संग बैठ कर स्टेशन आने का इंतजार ही करता रहा ।'
 "फिर उसके दादा जी बच गए थे ?'
     " समय पर मदद मिल जाती तो जरूर बच जाते... स्टेशन पर उतरने तक वो जीवित थे पर डाक्टर के आने तक उनकी मौत हो चुकी थी ।.... तब स्टेशन पर सब लोग उस लड़के से कह रहे थे कि तुम भी कितने बेवकूफ हो  यदि कोशिश करते तो ट्रेन में यात्रा कर रहा कोई डाक्टर  मिल सकता था ... टी टी को बता दिया होता तो वह डाक्टर का इंतजाम कर सकता था पर तुम ने कुछ नहीं किया ।'
      "मेरी बुआ हमेशा मुझे पत्रिकाएं पढ़ने को प्रेरित करती रहती हैं" बिना समय गवांए मैं इतनी  जल्दी  सक्रिय हो गई,निश्चय ही यह उनकी कहानी का असर था ।  ...ट्रेन में वह डाक्टर मुझे भगवान का रूप लगे थे पर अफसोस कि मैं उन का नाम और पता भी नहीं पूछ सकी।''
 "क्या मुझे वह बाल कहानी संग्रह पढ़ने को देगी ?'
 "हाँ ले लेना पर एक संग्रह पढ़ने से काम नहीं चलेगा, हमें अपनी उम्र के हिसाब से पुस्तकें व पत्रिकाएं पढ़ने की आदत डालनी चाहिए  ।'
 "हाँ  तुम बिलकुल  ठीक कह रही  हो , मैं आज ही मम्मी के साथ बाजार जा कर कुछ बाल पत्रिकाएं खरीद कर लाऊंगी  ।'
   
    


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6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही उम्दा भावाभिव्यक्ति....
    आभार!
    इसी प्रकार अपने अमूल्य विचारोँ से अवगत कराते रहेँ।
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

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  2. पवित्रा जी नमस्ते , आप भी शुभतारिका में छपती रही है पर मुझे याद है आपने बहुत पहले मुझे एक पत्र लिखा था तभी से मैं आपको जानती हूँ . आज यहाँ आपकी रचना पढ़ने मिली . कभी मेरे ब्लाग पर भी आइये .

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  3. प्रेरक कहानी समय आने पर चुपके से अपना काम कर जाती हैं। . बहुत अच्छी प्रेरक कहानी।

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  4. हार्दिक धन्यवाद कविता जी .

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