गुरुवार, 6 अगस्त 2015

बताना जरुरी है


बाल कहानी
                          बताना जरुरी है                                  
                                                                   पवित्रा अग्रवाल

   ग्यारहवीं क्लास में पढने वाली श्वेता ने कालेज जाते समय अपनी मम्मी से कहा --
“मम्मी आज मुझे कॉलेज से लौटने में थोड़ी देर हो जाएगी .”
“क्यों श्वेता ? “
‘आज मेरी दोस्त मधु  का जन्मदिन है ,इसलिए वह हमें पार्टी दे रही है .”
“किसी होटल में ?”
“नहीं माँ होटल तो बहुत मंहगा पड़ता है.हमारे कॉलेज के पास एक फ़ास्ट फ़ूड सेंटर है ,हम सभी को उसके आइटम टेस्टी  भी लगते हैं और हमारी पसंद की सब चीजें वहां मिल जाती हैं .”
“बेटा देख कर खाना .इस तरह के फ़ास्ट फ़ूड सेंटरों में सफाई का ध्यान कम रखा जाता है .”
“माँ हम वहां बहुत बार खा चुके हैं.सभी दोस्त खास मौकों पर वहीँ पार्टी करते हैं.”
शाम को श्वेता घर आई तो बोली – ‘माँ पेट में बहुत मरोड़ सा हो रहा है .लगता है उल्टी  भी आएगी ..कहते कहते वह भाग कर टॉयलेट में चली गई .आवाज से पता चल रहा था कि वह उलटी कर रही है .

       “माँ लगता है आपका कहना सही हो गया  ...लूज मोशन भी शुरू हो गए हैं.”
“बेटा अब मैं क्या बोलूँ ... तुम लोग सुनते नहीं हो ...सुबह ही मैं ने तुम्हें बताया था... .  मेरे पास दवा है, जल्दी फायदा हो जायेगा .”
     तभी श्वेता की दोस्त रानी का फोन आगया – “श्वेता मुझे और मधु को उल्टियाँ  हो रही हैं .डॉक्टर भैया छुट्टियों में आये हुए हैं इसलिए  फ़ौरन दवा दे दी वरना अभी डॉक्टर के पास जाना पड़ता .मधु को भी भैय्या की बताई दवा देदी है .तुम को भी कुछ हुआ है क्या ?”
     “हाँ रानी मेरा भी यही हाल है ,दवा लेली है .हम सब को एक साथ यह उल्टी- दस्त हुए हैं , इसका मतलब तो साफ है कि खाने में गड़बड़ थी .मम्मी ने तो सुबह ही वहां खाने को मना किया था ...अब आगे से वहां नहीं खायेंगे .”
'श्वेता भैया कह रहे हैं कि कल उस फ़ास्ट फ़ूड वाले को  डांट कर आना ....ठीक है अब फोन रखती हूँ .

     मम्मी ने पूछा --लगता है  तुम्हारी दोस्तों का भी यही हाल है ? ... श्वेता तुम लोगों ने वहां खाया क्या था ?”
“मम्मी हम सब ने चाय पी थी और नूडल्स , सेंडविच खाए थे .”
     ‘नूडल्स में कई तरह की सोसेज पड़ती हैं ,उसी में कुछ गड़बड़ हुई है .तुम सब जा  कर कल फ़ूड सेंटर वाले को  बताना कि उसका खाना ख़राब था .”
“रानी भी यही कह रही थी पर माँ अब इस सब से क्या फायदा , आगे से हम उसके यहाँ नहीं जायेंगे .” 
   “पर उसे जाकर बताना बहुत जरुरी है बेटा ताकि आगे से वह सावधानी बरते .वरना उसे कैसे  पता चलेगा की उस के खाने से तुम सब बीमार हो गए थे .’  
“मम्मी मानलो वह अपनी गल्ती मानने को तैयार नहीं हुआ और झगडा करने लगा तो ...?”
“   पहली बात तो वह ऐसा नहीं करेगा क्यों कि वह भी जानता है कि दूसरे  लोगों को यह पता चला  कि उसका खाना खाने से बच्चे बीमार हो गये थे  तो  सब वहां आना छोड़ देंगे ....उसका व्यापार चौपट हो जायेगा .''
 'मम्मी फिर भी  यह सब जरुरी है क्या ?'
     "बेटा यह गंभीर मामला है  और सब के स्वास्थ्य से जुडा है ,उसे बताना बहुत जरुरी है ....तुम 7-8 लड़कियाँ मिल कर जाना फिर भी यदि वह बहस  या झगड़ा करने लगे तो उस से कह  देना कि हम अभी  कॉलेज में  जाकर सब को बता देंगे और  प्रिंसपल से भी  शिकायत करेंगे  .तो तुम्हारे इस फ़ूड सेंटर में  ताला पड़ जाएगा  और अन्दर भी जा सकते हो  ”
“ हाँ माँ शायद आप  ठीक कह रही हैं , कल  हम  सब मिल कर उस से बात करेंगे .”
 दूसरे दिन श्वेता बहुत खुश हो कर लौटी थी - मम्मी वह फ़ूड सेंटर वाला अच्छा है ,हमें उसने शिकायत करने के लिये  धन्यवाद कहा ,वह तो पैसे भी वापस कर रहा था पर हमने कहा सफाई से बना हुआ अच्छा खाना खिलाओ यही काफी है .फिर भी उसने हम सब को काफ़ी पिलाई  और पैसे भी नहीं लिए .'


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