गुरुवार, 7 मई 2015

चोरी का माल




बाल कहानी  

                                चोरी का माल                                          
                                                                            पवित्रा अग्रवाल

    अमन पापा के साथ अपनी ज्वैलरी की दुकान पर बैठा था तभी एक दीन हीन सा आदमी आया और दुखी स्वर में बोला साहब मुझे पैसों की बहुत जरूरत है, बीबी दवाखाने में है. पचास हजार रुपए अभी जमा कराने हैं ,लेट होगया तो वह मर जाएगी '
 ‘इसमें हम तुम्हारी क्या मदद कर सकते हैं ?’
          उसने इधर उधर नजर दौड़ाई और बोला मैं बेचने को पत्नी के गहने लाया हूँ...उन्हें खरीद कर आप मेरी मदद कर सकते हैं।’
 ‘अरे हम तुम को जानते नहीं, पहचानते नहीं ऐसे गहने हम कैसे खरीद सकते हैं ? तुम अपने किसी पहचान वाले के यहाँ बेच सकते हो या गिरवी रख सकते हो ।'
"मैं इलाज के लिए गाँव से शहर आया हूँ ,यहाँ हमें कोई नहीं जानता.. साहब दया करो ।'
 "हम ऐसे कैसे खरीद सकते हैं, हमे क्या पता कि यह सोना कितना शुद्ध है'
‘आप जाँच करा ले ‘
 पापा ने गहने अंदर लेजा कर उनकी जाँच कराई फिर उनका वजन किया और बाहर आकर बोले – ‘ सोने में बहुत खोट है ,यह हमारे काम का नहीं है।’
  ‘वजन तो करिए कितना है कुछ कम पैसे दे देना’
 ‘वजन तो चालीस ग्राम है, हम चालीस हजार से ज्यादा नहीं देंगे ‘
 ‘क्या साब सोना तीस हजार से ज्यादा चल रहा है ,यह तो बीस ग्राम के भी पैसे नहीं है’
 "नहीं भाई आप किसी दूसरी दुकान पर जा कर बेच दो ...हमें नहीं चाहिए।’
 ‘ऐसा कैसे साब कम से कम एक लाख तो दीजिए।’
  तभी पुलिस को वहाँ घूमता देख कर वह आदमी डर गया बोला-‘ ठीक है कहीं दूसरी जगह दिखा लेता हूँ’
‘पापा आज ही मैं ने पेपर में पढ़ा था कि पुलिस ने जनता से चोरी का माल न खरीदने की अपील की है. साथ ही यह भी लिखा था कि चोर से चोरी का माल खरीदने वाला भी अपराधी ही माना जाएगा ...और पापा मुझे तो यह आदमी चोरी का माल बेचने वाला लगा, ...आपने देखा पापा पुलिस को देखते ही चल दिया .’
'हाँ बेटा तू सही हो सकता है. इस तरह की खबरें आती ही नहीं रहतीं,हमारे बाजार के कई लोग चोरी का माल खरीदने के आरोप में पुलिस द्वारा पकड़े भी जा चुके हैं।पर बेटा डर डर कर जीने से काम नहीं चलता, थोड़ी रिस्क तो लेनी ही पड़ती है।इसका माल अच्छा था, हो सकता है सचमुच उसकी पत्नी बीमार हो ।'
 ‘यदि पुलिस को देख कर वह चला न गया होता तो क्या आप वह गहने खरीद लेते ?’
 ‘सौदा पट जाता तो शायद खरीद लेता ,पहले भी कई बार खरीद चुका हूँ...भगवान की कृपा से अब तक तो नहीं फँसा हूँ।’
   ‘पापा देखिए, पुलिस ने किसी आदमी को पकड़ा हुआ है और उसे साथ लेकर सामने वाली ज्वेलरी शॉप में गए है .
 ‘ पुलिस ने उसे  चोरी का माल बेचते या कहीं चोरी करते पकड़ा  होगा , पूछा होगा कि माल कहाँ कहाँ बेचा ,जिस दुकान पर वह ले जाएगा पुलिस उसे भी गिरफ्त में ले लेगी फिर उससे भी पूछताछ होगी ।’
‘पापा इन लोगों को सचमुच याद रहता होगा कि कहाँ माल बेचा या भूल भी हो सकती है ?’
 ‘भूल भी हो सकती है... पर पुलिस को क्या ,वह आदमी जिस दुकान पर बेचने की बात कहेगा,  पुलिस तो उसे ही पकड़ कर ले जाएगी ।’
 ‘अच्छा हुआ पापा आपने उस आदमी से सोना नहीं खरीदा वरना किसी दिन  आप भी मुश्किल में पड़ सकते थे .’
 “बेटा इस व्यापार में यह बहुत साधारण सी बात है और करीब करीब हर कोई इस तरह से खरीद फरोख्त करते है और हम भी कोई ऐसे ही नहीं खरीद लेते, देख भाल कर लेते हैं .’
  ‘ पर पापा आज आप मुझ से प्रोमिज कीजिये कि आगे से आप इस तरह से कभी कोई सोना चांदी नहीं खरीदेंगे ...कुछ दिन बाद बहन की शादी है. उससे पहले या कभी बाद में भी आप ऐसे किसी मुसीबत में फंस गए तो ?’
‘हाँ बेटा यह बात तो तूने बिलकुल ठीक कही है यदि मेरे साथ भी कभी एसा हुआ तो  तेरी बहन के ससुराल में मेरी क्या इज्जत रह जाएगी और उसे भी जीवन भर ताने सुनने पड़ेंगे  ।’
‘तो पक्का प्रोमिज पापा ,आज से आप इस तरह का माल खरीदने के लालच में नहीं पड़ेंगे ?’
 ‘हाँ पक्का प्रोमिस बेटा .’
‘धन्यवाद पापा अब मैं तनाव मुक्त हो कर अपनी पढ़ाई कर पाउँगा .’




पवित्रा अग्रवाल

  ईमेल -
agarwalpavitra78@gmail.com

 
 
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5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (08-05-2015) को "गूगल ब्लॉगर में आयी समस्या लाखों ब्लॉग ख़तरे में" {चर्चा अंक - 1969} पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
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    1. बहुत बहुत धन्यवाद शास्त्री जी

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