सोमवार, 1 दिसंबर 2014

अवैतनिक सचिव


बाल कहानी


                 अवैतनिक सचिव 

                                                                     पवित्रा अग्रवाल


       सुबह स्कूल जाने के लिए तैयार होकर रमेश जब सुरेश के घर पहुँचा तो वहाँ सबको कुछ परेशान पाया। पूछने पर उसने बताया - "हम लोग पीने के लिए उबला पानी इस्तेमाल करते हैं। मम्मी रोज रात को एक स्टील के घड़े में पानी भर कर उसमें पानी गर्म करने की रौड लगा देती है करीब पचास मिनट में पानी उबल जाता है। दूसरे दिन ठंडा होने पर वही पानी मम्मी घड़े में पलट कर रख लेती हैं और वही पानी सब पीते हैं।'
    "यह तो अच्छी बात है'
 "बात तो अच्छी है...पर रात को मम्मी स्विच बंद करना भूल गई...पानी रात भर उबलता रहा, सुबह जब रसोई का दरवाजा खोला तो पूरी रसोई गीली थी। रात को भाप बनकर उड़ा पानी छत व दीवारों से टपक रहा था। पानी गर्म करने की रौड लाल होकर घड़े में लटकी हुई थी। घड़े में बस उतना ही पानी बचा था जो रौड से नीचे था।'
     सुरेश ने बताया कि इस लापरवाही के लिए पापा,मम्मी पर नाराज हुए।...मम्मी कुछ भुलक्कड़ भी हैं। इससे कोई दुर्घटना भी हो सकती थी।
    "लेकिन सुरेश इस तरह की भूल तो कभी, किसी से भी हो सकती है।...हमारे यहाँ बोरवेल है। रोज मोटर चला कर छत की टंकी में पानी भरना पड़ता है।...एक दिन मम्मी मोटर चला कर भूल गई। टी.वी. और कूलर की आवाज में बोरिंग की आवाज सुनाई नहीं दी। दो-तीन घंटे बाद जब उन्होंने टी.वी. बंद किया तो ज्ञात हुआ कि पानी ओवर फ्लो होकर न जाने कितनी देर से बह रहा था। मोटर भी बहुत गर्म हो गई थी.....
 उस दिन से मम्मी ने एक तरकीब निकाली। उन्हें जितनी देर के लिए मोटर चलानी होती है या जितने बजे मोटर बंद करनी होती है उतने बजे का घड़ी में अलार्म लगा देती है।...भूल भी जाए तो अलार्म याद दिला देता है। तुम्हारी मम्मी भी बंद करने के समय का अलार्म लगालें तो ऐसी भूल पुनः नहीं होगी।'
      "अरे वाह रमेश यह तो तुमने घड़ी का बड़ा अच्छा उपयोग बताया।...'
 "यही नहीं मेरी मम्मी तो अलार्म का दैनिक जीवन में बहुत उपयोग करती हैं। उन्हें कोई टी.वी. सीरियल देखना हो तो उस टाइम का अलार्म लगा देती हैं। कभी निश्चित समय कहीं जाना हो,कोई जरूरी दवा खानी हो.. छोटी बहन को स्कूल से लाना हो...तो बस अलार्म लगा कर निश्चिन्त हो जाती हैं।... उनकी ये ट्रिक हम लोग भी जरूरत पर इस्तेमाल कर लेते हैं। हम लोगों ने तो अलार्म पीस का नाम मम्मी की सचिव रख दिया है।'
     "सचिव, वह भी बिना वेतन वाली यानी कि अवैतनिक सचिव।"



-पवित्रा अग्रवाल

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