शुक्रवार, 1 अगस्त 2014

यह भी चोरी है

बाल कहानी
 
                      यह भी चोरी है

                                                                    पवित्रा अग्रवाल

 सोमेश को पुस्तक के पन्ने फाड़ते देख कर मम्मी ने टोका --" बेटा यह किस की किताब है और तुम इस किताब में से पन्ने क्यों फाड़ रहे हो ?'
 "मम्मी यह स्कूल के पुस्तकालय  किताब है, कल इसे पुस्तकालय को लौटाना है और मुझे इस में से डिवेट के लिए कुछ सामग्री चाहिए पर अब पढ़ने का समय नहीं है ।'
  "सामग्री चाहिए तो ये इतनी सारी जीरोक्स की दुकाने हैं , किताब ले जा कर उन पन्नों की जीरोक्स करा लाओ । '
 "अरे मम्मी देखो न बाहर पानी बरसने को है और मेरा मन अभी बाहर जाने को नहीं है।'
 'देखों बेटा यह बहुत गलत बात है ।पुस्तकालय का मतलब है पुस्तकों का घर।स्कूल - कालेज में,गाँव  ,शहर में पुस्तकालय इसी लिए होते हैं कि वहाँ पर विभिन्न विषयों की पुस्तकें एक जगह मिल जाती हैं  ।हमें किसी खास विषय पर कुछ जानकारी चाहिए तो उसके लिए हमें पुस्तकालय से बहुत मदद मिलती है क्यों कि एक एक  जानकारी  प्राप्त करने के लिए पुस्तक खरीदना हरेक के बस की बात नहीं है। जिस विषय पर  किसी  को जानकारी चाहिए ,वह लाइब्रेरी का सहारा लेता है। लाइब्रेरी की पुस्तको की रक्षा करना हर पाठक का फर्ज है।... पन्ने फाड़ने की गल्ती नहीं करनी चाहिए ।'
 "अरे मम्मी एक मेरे न फाड़ने से क्या होगा... बहुत से बच्चे फाड़ते हैं ।कई बार ऐसा हुआ है कि मुझे भी मन चाही सामग्री नहीं मिली ...पन्ने फटे हुए थे ।'
 " और वहीं गलती तुम भी करने जा रहे हो । बेटा यह भी एक तरह की चोरी ही है ।'
  "इसे भी चोरी कहेंगे ?'
 'बिल्कुल यह भी चोरी है ।अब तुम बता रहे थे कि तुम्हारे यहाँ एक बच्चे ने किसी की किताब चुरा ली थी, पकड़े जाने पर उसे सबके सामने सजा दी गई थी  ,इसी तरह यह किताब तुम्हारी नहीं,स्कूल की  है ,चुपके से या चोरी से उसके पन्ने फाड़ना भी चोरी  है ? "
 "हाँ ,आप ठीक कह रही हैं ...थैंक यू मम्मी आपने मुझे एक गलत काम करने से बचा लिया।मैं अभी जाकर इनकी जीरोक्स करा के लाता हूँ।'
 दूसरे दिन सोमेश जब पुस्तकालय में किताब लौटाने गया तो लाइब्रेरी वाले सर दो बच्चों को डाँट रहे थे, उन्होने बच्चो को चुपके से कुछ पन्नें फाड़ते देख लिया था ...उन बच्चों का नाम लिख कर उन पर फाइन लगा दिया गया था ।...सोमेश की किताब भी खोल कर सर ने चैक की थी ।
 सोमेश मन ही मन मम्मी को थैंक्स कह रहा था ।

     
   
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      पवित्रा अग्रवाल

      

                              
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