गुरुवार, 1 मई 2014

बुरखे वाला लड़का

बाल कहानी                 
                                    बुरखे वाला लड़का                  

                                                                              पवित्रा अगवाल

       सिनेमा हाल के मैनेजेर ने पुलिस जीप रुकते ही उनकी अगवानी की और कहा-- "सर मैं यहाँ का मैनेजर हूं, मैं ने ही आपको फोन किया था।'
      "ओ के, कहाँ है वह लड़का जिसे आपने में बुर्खे में पकड़ा है... किस उम्र का होगा ?"
      "सर जो बुर्खे में था वह तेरह चौदह वर्ष से ज्यादा का नहीं लगता ...साथ में उसका एक साथी भी  था,वह सतरह अठारह वर्ष का होगा ।हमने दोनो को पकड़ लिया है ।'
     "  ओ के , वैल डन ...कहाँ है वे दोनो ?"
       "हमारे आफिस में हैं सर ।'
 पुलिस को आता देख कर दोनों लड़के भय से काँपने लगे थे - "हमने कुछ नहीं किया सर ।'
 "वह सब तो बाद में पता चलेगा।पहले अपने अपने नाम बताओ ।'
       छोटा लड़का बोला - सर मेरा नाम यूनुस है और इसका नाम कमाल है।यही पिक्चर का लालच देकर  मुझे  यहाँ लाया था ।'
 "सच सच बताओ तुम इस बच्चें को बुर्खा पहना कर क्यो लाए थे ,तुम्हें किस ने भेजा था और तुम क्या करना चाहते थे ?'
 "सच मानिए सर यह सिर्फ एक मजाक था ,हम यहाँ कुछ भी गलत नहीं करना चाहते थे ।'
    दोनो लड़कों को दो दो थप्पड़ मारते हुए इंसपैक्टर ने दोनो सिपाहियों से कहा ये यों आसानी से कुबूल करने वाले नहीं है। इन सालों को जीप में डाल कर थाने ले चलो, वहीं सच उगलवायेंगे ।'
       दोनो लड़के पैर छू छू कर माफी माँग रहे थे और  छोड़ देने की विनती कर रहे थे।उन्हें पुलिस स्टेशन लेजाया गया।
    तलाशी में उनके पास से कुछ आपत्तिजनक सामान नहीं मिला था, उनसे पूछताछ जारी थी   नाम, पता, पिता का नाम, पिता का व्यवसाय, स्कूल -कालेज की जानकारी इकट्ठी की गई। तुम्हे यहाँ किसने भेजा ....किस उद्देश्य से आए थे बहुत सारे सवाल थे । अनुमान था कि यह जरूर किसी गलत इरादे से सिनेमा हाल गए थे.. हो सकता हैं  कोई आतंकी साजिश रची जा रही हो जिसमें इन लड़कों  को मोहरा बनाया जा रहा हो ।
     बच्चों से नंबर लेकर उनके घर वालों को पुलिस स्टेशन आने को कहा गया , लडको की पिटाई भी हुई पर वह कुछ बता नहीं पाए।कमाल जो दूसरे लड़के को बुर्खे में लाया था  वह बस एक ही बात कहे जा रहा था कि मैं ने अपने दोस्तों को बेवकूफ बनाने के लिए यह नाटक किया था ,यह सब मजाक था और मजाक के सिवाय कुछ नहीं था ।'
      "तुम्हारे साथ तो कोई दोस्त नहीं पकड़ा गया तुम किन्हें बेवकूफ बनाना चाहते थे ?'
     "सर हमें पकड़े जाते देख वह भाग गए ,शायद वे डर गए होंगे ।'
    "तुम्हारे साथ कितने दोस्त थे ?
     "सर हमे छोड़ कर तीन और थे ।'
     "उनके नाम और मोबाइल नंबर दो ।'
 यूनुस और कमाल के पिता और भाई आदि थाने आ गए थे । सब परेशान थे कि यह क्या किया इन लड़कों ने ।आजकल आतंकवाद के चलते वैसे ही शहर में बहुत सख्ती बरती जा रही है और यह लड़के ऐसा कारनामा कर बैठे।खुदा जाने अब क्या होगा। इनकी तो जिन्दगी बरबाद हो जाएगी ।
    पुलिस उनके तीनों दोस्तों को फोन कर रही थी पर सबके स्विच आफ आ रहे थे ।
   पुलिस ने यूनुस और कमाल को जीप में बैठाया और उन लड़को के घर की तरफ चल दिए । एक लड़का तो घर पर मिल गया पुलिस उसे उठा लाई ।दो लड़के तलाशी लेने पर भी घर में नहीं मिले तो घरवालों से कहा उन को लेकर तुरन्त थाने पहुँचो वरना  तुम्हें पकड़ लिया जाएगा ।'
      लड़कों के स्कूल जाकर भी जानकारी इकट्ठी की गई ।थोड़ी ही देर में घर वाले उन दोनो लड़को को ले कर थाने पहुँच गए ...पुलिस ने अपनी तरह से उन लड़को से भी अलग अलग पूछताछ की । सब ने करीब करीब एक ही बात कही तो पुलिस को विश्वास हो गया कि लड़के बहुत शरारती हैं पर कोई अपराधी वृत्ति के नहीं हैं पर इस पूरी छानबीन के चलते सबको एक रात जेल में बितानी पड़ी । सब के घर वाले परेशान थे कि केस बन गया तो जाने क्या होगा ,बच्चें निर्दोष भी साबित हुए तो भी पुलिस न जाने कितना धन ऐंठ  लेगी।
    पर पुलिस इंसपैक्टर बहुत समझदार था ,इमानदार भी। पुलिस ने बच्चों को उनकी गल्ती बता कर, धमका कर और उनके माता पिता को चेतावनी देकर उन्हें बिना किसी कानूनी पचड़े में फँसाए छोड़ दिया।
     कमाल से सबने पूछा - "तू इस लड़के को बुर्खा पहना कर क्यों ले गया था ?'
 कमाल ने बताया कि उसके कुछ दोस्तों की गर्ल फ्रेण्ड थीं। वह सब मिल कर मुझे  छेड़ते थे कि तेरी कोई गर्ल फ्रेण्ड क्यों नही है । उस मजाक से बचने के लिए मैंने झूठ कहना शुरू कर दिया कि मेरी भी एक गर्ल फ्रेण्ड है पर उसको अपने साथ लेकर यों घूम नहीं सकता ।
 एक दिन दोस्तों ने कहा तू झूठ बोलता है तेरी कोई गर्ल फ्रेण्ड है ही नहीं या फिर तू जरूरत से ज्यादा डरपोक है।..मुझे भी जोश आगया और मैं इस परिचित बच्चे को सिनेमा दिखाने का लालच देकर बुरखा पहना कर यहाँ ले आया और दोस्तो से कह दिया था कि मेरी दोस्त मुँह नहीं खोलेगी... किसी परिचित ने उसे  देख लिया तो हम दोनो मुसीबत में पड़ जाएंगे ।.... पर इस बड़ी मुसीबत में फँसने का तो अंदाजा भी नहीं था ।'
      "हाँ बरखुरदार जोश में तुम होश खो बैठे थे, खुदा के फजल से बस बच ही गए वरना...
      "हाँ अब्बा इंसपैक्टर अंकल बहुत नेक थे , अब हम कभी ऐसी शरारतें नहीं करेंगे।''
   
 
         पवित्रा अग्रवाल
       
     ईमेल --   agarwalpavitra78@gmail.com
     

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