मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

सोनम की समझदारी

बाल कहानी   

                सोनम की समझदारी  

                                                          पवित्रा अग्रवाल 
 
         गर्मी की छुट्टियों में सोनम दिल्ली से अपने मामा के पास हैदराबाद गई हुई थी। उसके मामा ने वहाँ नई कोठी बनवाई थी। परीक्षाओं की वजह से वह गृहप्रवेश के समय नहीं जा पाई थी। कोठी तो बहुत सुंदर थी लेकिन वहाँ थोड़ा सन्नाटा था। आस पास कोई घर इतनी दूरी पर न था कि पुकारने से आवाज वहां पहुँच जाए।
      मामाजी को ऑफिस के काम से एक सप्ताह के लिए दिल्ली जाना पड़ा। सोनम उसकी मामी व उनके दो छोटे बच्चे घर में रह गए थे। मामी वैसे तो घर में कई बार अकेली रही हैं किंतु तब वह फ्लैट में रहती थीं। वहाँ कोई डर नहीं था। इस नए मकान में आने के बाद यह पहला अवसर था जब मामा जी को कहीं बाहर जाना पड़ रहा था। जाते समय वह भी कुछ परेशान थे। वह हम सबको खूब समझा-बुझा कर गए थे। पुलिस व परिचितों के नंबर भी दे गए थे।
 चार दिन आसानी से कट गए। रोज रात को मामाजी दिल्ली से फोन पर बात कर लेते थे। एक दिन आधी रात को दरवाजे के बाहर कुछ आहट सुन कर मामी की नींद खुल गई। उन्होंने सोनम को भी जगा लिया।
       मामी ने दरवाजे पर लगी "मैजिक आई' में से बाहर देखा तो पाया कि एक आदमी रसोई में लगे एग्जौस्ट फैन को हटाने की कोशिश कर रहा है और दो आदमी उसके पास में खड़े हैं। यदि वह पंखा हट गया तो वह दुबला-पतला आदमी उस रास्ते से रसोई में आराम से प्रवेश पा सकता है बस यही सोच कर मामी ने सबसे पहले रसोई का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया ताकि चोर रसोई से घर के अन्य भाग में न आ पाए।
 मामी ने पुलिस को फोन करना चाहा पर फोन उठाते ही वह घबरा कर बोलीं - "अरे सोनम, फोन तो खराब है। अब क्या होगा ? शोर मचाने से भी कोई फायदा नहीं,सब घर दूर-दूर हैं यहाँ कोई हमारी मदद को नहीं आ पाएगा।'
      सोनम ने इशारे से मामी को चुप रहने को कहा फिर जोर से बोली - "मामी, दूसरा फोन ठीक है। मैं अभी पुलिस को फोन करती हूँ।'
     वह दरवाजे के पास जाकर जोर से ऐसे बोलने लगी जैसे फोन पर बात कर रही हो, "हैलो, पुलिस स्टेशन...हैलो इंस्पेक्टर साहब, मैं जुबली हिल्स रोड, कोठी नंबर 36 से बोल रही हूँ। हमारे घर में चोर घुस आए हैं...आप जल्दी आइए...क्या कहा...आप का पुलिस दस्ता इस क्षेत्र में गश्त लगा रहा है...अच्छा, आप वायरलेस पर सूचना देकर हमारे पास भेज रहे हैं...क्या, पाँच मिनट में पुलिस यहाँ पहुँच  जाएगी ...धन्यवाद अंकल, हमें बहुत डर लग रहा है...मामी, पुलिस पाँच मिनट में यहाँ पहुँच जाएगी।'
    सोनम इतनी जोर से बोल रही थी ताकि बाहर चोरों तक भी उसकी आवाज पहुँच सके।
 तभी बाहर भगदड़ की आवाज सुनाई दी, फिर एक कार स्टार्ट करने की आवाज आई।
 "मामी, लगता है चोर पूरी तैयारी के साथ कार लेकर आए थे...लेकिन पुलिस के डर से भाग गए।'
 "अरे सोनम, तू तो बहुत समझदार निकली। फोन कर ने की एÏक्टग कर के ही चोरों को भगा दिया...यह विचार तेरे दिमाग में आया कहाँ से ?... डर के मारे मेरे तो हाथ-पाँव फूल गए थे।'
 "अरे मामी, मैं दिल्ली की लड़की हूँ। इतनी आसानी से हिम्मत नहीं हारती।'
 मामी ने स्नेह से उसे अपने सीने से लगा लिया।
    दूसरे दिन पड़ौसियो ने पुलिस में रिपोर्ट कराई।पुलिस को जब सोनम की समझदारी का पता चला तो वह भी दंग रह गई।
 जब सोनम के माता-पिता को उसकी सूझबूझ का पता चला तो वे बेहद प्रसन्न हुए। दिल्ली से लौट कर मामा ने उसे शाबाशी देते हुए एक डिजिटल डायरी इनाम में दी।

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 -पवित्रा अग्रवाल

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