बुधवार, 1 जनवरी 2014

पंतग लूटने का मजा

बाल कहानी 


   पंतग लूटने का मजा  

                                      पवित्रा अग्रवाल 
 
 "देबू आज तो स्कूल की छुट्टी हो गई है,मेरे घर चल पतंग उड़ायेंगे' --सुमित ने कहा
 "अरे यार अभी तो संक्रान्ति को आने में बहुत दिन हैं...इतने दिन पहले नहीं, वैसे भी अभी तो आसमान में  एक भी पतंग उड़ती नहीं दिखाई दे रही।'
 "शुरुआत हम ही करते हैं,तू देखना एक पतंग उड़ते अनेक पतंगें उड़ने लगेंगी।'
 "सुमित, क्या बाजार में पंतग मिलनी शुरू हो गई ?'
 "पता नहीं पर मेरे पास तो पिछले साल की बहुत सी पंतग रखी हैं ।'
 "तेरी मम्मी गुस्सा तो नहीं करेंगी ?'
 "नही मेरी मम्मी कुछ नहीं कहतीं,उन्हें घर -बाहर का काम ही इतना रहता है कि यह सब देखने की फुर्सत उनके पास नहीं है ।
 " अरे वाह सुमित तेरी मम्मी तो बहुत अच्छी हैं...मेरी मम्मी की तो मेरे हर काम पर नजर रहती है। हर समय  टोका टाकी करती रहती हैं कि यह करो यह मत करो ।'
 "असल में मेरी मम्मी नौकरी करती हैं न इसलिये उनके पास यह सब देखने को समय नहीं रहता ।'
 "पहले मेरी मम्मी भी काम करती थीं पर हम लोगों की देख भाल अच्छी तरह हो सके इसलिये काम छोड़ दिया ।'
 "अच्छा...वैसे मेरे पापा भी यही चाहते थे पर मेरी मम्मी काम छोड़ने को तैयार नहीं थीं ...चल छोड़ इन सब बातों को ... पतंग ले कर छत पर चलते हैं ।'
 "ठीक है चलते हैं ।'
 "वैसे देबू मुझे पतंग उड़ाने की तुलना में लूटने में ज्यादा मजा आता है...पतंग लूटने के चक्कर में एक बार तो मैं छत से नीचे गिरते गिरते बचा था।'
 "फिर भी तेरे मम्मी पापा तुझे पतंग उड़ाने देते हैं ?'
 "मैं ने यह बात किसी को नहीं बताई वरना मेरा पतंग उड़ाना बंद हो जाता ।'
 "सुमित ,मेरी मम्मी ने मुझे एक ही शर्त पर पतंग उड़ाने की छूट दी है कि मैं सिर्फ पतंग उड़ाऊं ,कटी पतंग को लूटने की कोशिश बिल्कुल न करूँ ।'
 "फिर तू उनकी आज्ञा का पालन करता है ?'
 "हाí मैं पतंग लूटने उसके पीछे नहीं भागता ।पतंग लूटने के चक्कर में जान जा सकती है।सब से बुरा तो तब होता है कि जान तो जैसे तैसे बच गई पर जिन्दगी भर के लिए अपाहिज हो गए ।असल में मेरे एक चाचा हैं। वह दूसरे शहर में रहते हैं, वो बैसाखी के सहारे चलते हैं ।पापा ने बताया था कि वह बचपन में पतंग लूटने के चक्कर में छत से गिर पड़े थे ।....
 उनकी हालत देख कर मैं ने मम्मी पापा से वायदा किया था कि मैं पतंग लूटने की कोशिश कभी नहीं करूँगा।..पिछले वर्ष अखवार में पढ़ा था कि एक बच्चा छत पर पड़ी लोहे की रौड से कटी पतंग रोकने के कोशिश कर रहा था,रौड हाइ टेंशन वायर से छू गई ।बच्चे की वहीं मौत हो गई थी ।'
 "हाँ पतंग के दिनों में एसी कई दुर्घटनायें हर वर्ष होती हैं...पर दोस्त देबू मैं भी आज तुझ से वादा करता हूँ कि कटी पतंग को पकड़ने की कोशिश कभी नहीं करूँगा।'
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-पवित्रा अग्रवाल

 

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    गये साल को है प्रणाम!
    है नये साल का अभिनन्दन।।
    लाया हूँ स्वागत करने को
    थाली में कुछ अक्षत-चन्दन।।
    है नये साल का अभिनन्दन।।...
    --
    नवल वर्ष 2014 की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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    1. aap ko bhi nav varsh ki bahut bahut shubh kamnaye shashtri ji . kahani aapko achchi lagi jan kar harsh hua dhanyvad

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