रविवार, 1 सितंबर 2013

गणेश चन्दा

बाल कहानी    
                         
          गणेश चन्दा
   
                                                                       पवित्रा अग्रवाल


  "सोनम दरवाजे पर कौन था ?'
 " माँ गणेश का चन्दा मांगने के लिए चार पाँच लड़कों का ग्रुप आया  है।'
 " अरे हाँ अब गणेश चतुर्थी आ रही है यानि गणेश बैठाने के दिन, अब बच्चें दरवाजे की        घन्टी बजा बजा कर परेशान करते रहेंगे ।'
  "आप कल जब घर पर नहीं थीं तब भी,तीन चार ग्रुप चन्दा माँगने आए थे।'
 "फिर तूने उन्हें चन्दा दिया ?"
 "नहीं मम्मी आप घर पर नहीं थी ,मैं किसी को जानती नहीं  ... मैं ने तो दरवाजा भी नहीं खोला।'
 "अच्छा किया ।...हर गली,नुक्कड़ मे तीन चार गणेश बैठाते हैं। इस तरह अपने घर के आसपास कम से कम  छह- सात गणेश  लगेंगे । कुछ साल पहले एक बड़ा सा गणेश लगता था, सब वहीं पूजा कर लेते थे पर अब हर कोई अपने घर के सामने गणेश लगाने को तैयार बैठा है और हर किसी को चन्दा चाहिए। '
 "हाँ माँ अपने अपने गणेश अलग बैठाने का शौक है तो बैठाए, पर सब से चन्दा क्यों माँगते फिरते हैं ?..."
     " बेटा इस क्यों का कोई जवाब नहीं है। "
  "माँ वह लोग दरवाजे पर खड़े हैं,पहले उनसे बात करलो ।'
 "ठीक है अभी बात करती हूँ - " क्या बात है बच्चों, क्यों बैल बजा रहे हो ?'
 "आन्टी गणेश का चन्दा लेने आए हैं।'
 'अपने एरिये में बहुत वर्षो से इतना बड़ा गणेश लगता है, वह पूजा करने के लिए बस नहीं होता ?'
 "वहाँ बहुत भीड़ हो जाती है आन्टी फिर हम तो अपने घर के बाहर छोटा सा गणेश लगाते हैं,अच्छी तरह पूजा करने को भी मिल जाती है।'
 "क्या तुम लोग स्कूल नहीं जाते हो ?'
" जाते हैं न आन्टी, मैं नौ क्लास में पढ़ता हूँ, यह सब भी ऐसे ही अलग अलग कक्षाओं में पढ़ते हैं'
 "जो समय तुम इस काम में व्यर्थ  कर रहे हो वह समय तुम्हें अच्छे से पढ़ने लिखने में लगाना चाहिए।'
 "आन्टी गणेश इसी लिए तो बैठा रहे हैं ताकि अच्छे से पूजा कर सकें और वह हमें आशीर्वाद दें।'
 "यदि तुम बड़े गणेश की पूजा करोगे  या किसी दूसरे गणेश मंदिर में जा कर पूजा करोगे तो क्या भगवान तुम्हें आशीर्वाद नहीं देंगे ?'
 "देंगे पर इस से ज्यादा खुश होंगे , प्लीज आन्टी दीजिए न यह तो धर्म का काम है ।'
 "हाँ बेटा धर्म का काम है और हम हर वर्ष बड़े गणेश को बड़ा चन्दा देते हैं और पूजा करने के लिए एक    गणेश बहुत हैं तुम लोगों को भी उन्हीं की पूजा करनी चाहिए ...हम ज्यादा गणेश  बैठाने के पक्ष में नहीं हैं । '
 "पर क्यों आन्टी ?'
 " बच्चों इस विषय में तुम्हें मैं जरूर बताना चाहूँगी। गणेश प्रतिमाए क्या मुफ्त में मिलती है ?"
 "आन्टी मुफ्त में मिलतीं तो हम चन्दा क्यों माँगते,बहुत मंहगी मिलती हैं और बड़े गणेश तो सुना हैं साइज के हिसाब  से चालीस -  पचास हजार तक आते हैं ?'
 "बेटा एक बात बताओ ...अपने शहर में कितने गणेश बिठाए जाते होंगे ? '               
 "कम से कम छह  हजार ..और हर वर्ष इनकी संख्या बढ़ती जा रही है।'
  "यानि करोड़ों रुपए के गणेश ख़रीदे जाते हैं  जाते हैं और  कुछ दिन पूजा के बाद उनको नदी ,तालाबों में डाल कर जल को प्रदूषित किया जाता है ... और यह हिसाब तो एक शहर का है, पूरे देश में कितना धन इस पर खर्च होता होगा ? और यह तो सिर्फ प्रतिमाओं की कीमत है...बाकी सब अलग ..बेटा तुम  सोचो आज कितने बच्चें धन के अभाव में स्कूल नहीं जा पाते, ऊँची पढाई नहीं कर पाते ।'
 "हाँ आन्टी बहुत से तो पढ़ाई की उम्र तक ही नहीं पहुँच पाते... उस से पहले ही भूख और बीमारी के
शिकार हो कर मर जाते हैं।'
 "हाँ बेटा मैं बस तुम लोगों को यही बताना चाह रही थी ...यह पैसा सही जगह लगे तो कितनों का भला हो सकता है।'
 "पर आन्टी एक दो के न लगाने से क्या फर्क पड़ना है ?'
      "बेटा लोगों को जागरूक करना पड़ेगा।हम जैसे लोग चन्दा माँगने वालों को चन्दा न देकर उन्हें न देने की वजह बताऐ। मीडिया समाचार पत्रों व टी वी चैनलों के माघ्यम से इस तरह के संदेश को प्रसारित हों तो धीरे धीरे ही सही जरूर जागृति आएगी ।'
 "हाँ आन्टी हम ने इस तरह से कभी सोचा ही नहीं और किसी ने इस तरह से हमें समझाया भी नहीं ।'
 " आन्टी अब बात हमारी समझ में आ गई है। हम अब से बड़े गणेश की ही पूजा करेंगे और दूसरे लोगो को भी समझाने की कोशिश करेंगे ।'
 "थैंक्यू आन्टी हमारा मार्गदर्शन करने के लिए ।'