गुरुवार, 6 जून 2013

लगाम जरूरी लगाम जरूरी

बाल कहानी
                          
                              लगाम जरूरी                                                                                                                                                                        पवित्रा अग्रवाल
              कालेज में कक्षाएं शुरू हो चुकी थीं। अपने प्रिय मित्र संयम को न देख कर प्राण और हीमेश को कुछ चिन्ता होने लगी ।
             प्राण ने कहा -- "परीक्षाओ के दिन हैं ,इन दिनों तो सब बच्चों पर तैयारी का भूत सवार रहता है पर संयम क्यों नहीं आया ।...किसी से पता करना होगा ।'
          "संयम राहुल के घर के पास  ही रहता है। यह क्लास समाप्त होने पर राहुल के पास चल कर पूछते हैं।'
         " हाँ याद आया ,दोनो एक ही अपार्टमेंन्ट में रहते हैं , शायद उसको कुछ जानकारी हो ।'
          शिक्षक के जाते ही प्राण और हीमेश कक्षा से बाहर आए तो राहुल सामने ही खड़ा मिल गया।
         "राहुल आज संयम कालेज क्यों नहीं आया ?'
         "तुम्हें नहीं पता ?...  संयम के बहुत चोट आई है, इस समय वह अस्पताल में है।'
         "उसे चोट कैसे लगी ,कहीं गिर गया था क्या ?'
        "अरे नहीं, वह रात को अपने किसी दोस्त के यहाँ से बाइक पर लौट रहा था, सामने से आती किसी कार से टक्कर  हो गई थी, तो वह गिर पड़ा... सब से अधिक चोट सिर में लगी है...अभी वह बेहोश है और उसकी हालत चिन्ताजनक है।'
       "  वह  बाइक पर वह अकेला था ? '
       "नहीं साथ में उसका कजिन भी था ।'
        "उसको चोट नहीं आई ?'
       "वह बच गया , पर उसके हाथ की  हड्डी टूटी है ।'
       "निश्चित रूप से उसने हैलमेट नहीं लगा रखा होगा ।'
        "हाँ तुम्हारा अनुमान बिलकुल सही है ....डाक्टर्स भी यही कह रहे थे कि यदि उसने हैलमेट लगा रखा होता तो वह सिर की चोट से बच सकता था। पुलिस भी आ गई थी...संयम के पास लाइसेंन्स भी नहीं था।'
        "हमारे बराबर का ही तो है, इस उम्र में लाइसेंन्स बन ही नहीं सकता। उसके बाइक लेने के बाद मैं ने भी घर में जिद्द की थी कि मुझे भी बाइक दिला दो...पर मम्मी पापा ने सख्ती से मना कर दिया ।...बोले अभी तुम्हें अठारह साल का होने में एक वर्ष है, उस से पहले तुम्हें न तो लाइसेन्स मिलेगा और ना बाइक...मैं ने  उन्हें बताया कि हमारे साथ के कई लड़के बाइक पर आते हैं और उनके पास लाइसेन्स भी है।'
         पापा ने कहा - "उन लोगों ने उम्र गलत बता कर लाइसेंन्स ले लिया होगा...जो कि सही नहीं है।पापा बड़बड़ाए थे कि पता नहीं कैसे माँ बाप हैं जो बच्चों की गलत जिद्द को पूरा करने के लिए इस तरह झूठ का सहारा लेते हैं...*
        मम्मी ने भी पापा की बात को सही ठहराते हुए कहा था - " बच्चों को झूठ और बेइमानी का पाठ तो वही पढ़ा रहे हैं।'
      "हाँ तुम्हारे मम्मी पापा ने ठीक कहा था।...मैं तो अठारह का हो चुका हूँ ...मेरे पास लाइसेंन्स भी है और घर पर बाइक भी।... फिर भी मुझे कालेज बाइक से आने की छूट नहीं है ।कभी बाइक से जाता भी हूँ तो हैलमेंट लगाने की शर्त पर ही बाइक दी जाती है...साथ ही चेतावनी भी कि किसी दिन तुम को बिना हैलमेंट के बाइक चलाते देख लिया तो उसके बाद तुम्हें बाइक नहीं दी जाएगी।'
        "हाँ राहुल हमें इस तरह का अनुशासन बुरा तो लगता है पर वह हमारे भले के लिए ही ऐसा करते हैं।'
        राहुल ने पुन: कहा -"सुना है कि कार चलाने वाला बच्चा भी कम उम्र का था।....लोगों ने कार का नंबर नोट कर लिया है।...एक दो दिन में पकड़ कर उस पर भी कार्य वाही होगी।'
        "ऐसे लोगों के साथ ट्रेफिक पुलिस वालों को भी सख्ती करनी  चाहिए ।'
      " हाँ यार लगाम तो लगानी चाहिए । ...देख वो हमारी मैडम क्लास लेने आ रही हैं,हम चलते हैं ...शाम को संयम को देखने अस्पताल चलेंगे ।'
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    ईमेल -- agarwalpavitra78@gmail.com-पवित्रा अग्रवाल