शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013

सवाल सुरक्षा का

बाल कहानी 
                            
  सवाल सुरक्षा का

                                                     
                                        पवित्रा अग्रवाल       

          
            आटो के हार्न की आवाज सुन कर मम्मी ने नागेश से कहा, "नागेश जल्दी से स्कूल बैग और लंच बास्केट उठाओ तुम्हारा आटो आ गया।'
           "मम्मी मैं इस आटो से नहीं जाऊंगा।आटो वाला एक बार में दस बच्चों को ले जाता है। मुझे तो अक्सर आटो ड्राइवर के बराबर में खड़े होकर स्कूल जाना पड़ता है। कल ही हमारे स्कूल के बाहर एक एक्सीडेंट हुआ है। उस आटो में दस-ग्यारह बच्चे सवार थे। तीन तो आटो वाले के पास थे। एक उसके दाएँ, एक बाएँ खड़ा था, एक उसने अपनी गोद में बैठा रखा था।सात-आठ बच्चे पीछे बैठे थे। आटो को अचानक ब्रेक  लगाने से कई बच्चे आटो से गिर गए, उनमें से दो की हालत गंभीर है।'
        "तुमने पहले तो कभी नहीं बताया कि आटो वाला दस बच्चों को एक बार में ले जाता है।...आटो में इतनी जगह ही कहाँ होती है कि उसमें इतने सारे बच्चे अपने भारी-भारी स्कूल बैग, पानी की बाटल, लंच बास्केट के साथ समा सकें। आटो तय करते समय ही मैंने उससे स्पष्ट कह दिया था कि पाँच-छह बच्चों से ज्यादा बच्चे नहीं ले जाएगा।'
         "मम्मी पहले तो वह छह बच्चों को ही ले जाता था। धीरे-धीरे बढ़ा कर अब वह दस बच्चों को ले जाने लगा है।'
          "चल आटो ड्राइवर रामलू से मैं अभी बात करती हूँ।'

         "रामलू तुम से हमने पहले ही कहा था कि तुम एक साथ पाँच-छह बच्चों से ज्यादा  नहीं  ले जा ओगे।...नागेश कह रहा है अब तुम दस बच्चों को ले जाते हो ?'
        "अम्माँ आपके बच्चों को मैं सही सलामत रोज घर लाता हूँ कि नहीं ?...कभी किसी को चोट लगी है ?..'
        "कल ही आटों से गिर कर दो बच्चे अस्पताल में पड़े मौत से लड़ रहे हैं। पिछले वर्ष भी कई बच्चों की इसी तरह हुई मौत का समाचार अखबारों में पढ़ा था।...हम अपने बच्चों को तुम्हारे साथ तभी भेजेंगे जब तुम बच्चे कम कर लोगे।...नागेश को उसके पापा स्कूटर से छोड़ आएँगे।'
       दूसरे दिन रामलू फिर आया, "अम्माँ कल आप दूसरे बच्चों के सामने बोले थे न कि नागेश को तुम्हारे साथ तभी भेजेंगे जब तुम छह से ज्यादा बच्चे नहीं ले  जाओगे।...सब बच्चे अपने घर जाकर बोले होंइगे। आज सब लोगाँ आपकी ही बात बोल रहे  हैं  कि छह बच्चों से ज्यादा लेके जाते तो अपना बच्चा नहीं भिजाते।'
          "सब ने ठीक ही कहा है।...सवाल हमारे बच्चों की सुरक्षा का है।'
          "अम्माँ जिंदगी और मौत तो ऊपर वाले के हाथ है। आप क्या समझते जिस आटो  में चार-छह बच्चे होंइगे उस का एक्सीडेंट कभी नहीं होइगा ?'
          "देखो रामलू एक्सीडेंट तो कभी किसी का भी हो सकता है फिर भी कुछ एक्सीडेंट सावधानी बरतने से टाले जा सकते हैं। यदि सावधान रहा जाए तो एक्सीडेंट की संख्या कम अवश्य हो सकती है। पिछले वर्ष दुर्घटनाओं को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने "छह बच्चों से ज्यादा ले जाने वाले आटो का चालान हो जाएगा ' ये नियम बनाया था लेकिन तुम लोगों ने आटों स्ट्राइक कर दी...लेकिन इस मामले में हम माँ-बाप कोई समझौता नहीं करेंगे।'
       "ठीक है अम्माँ अब से हम छह से ज्यादा बच्चे लेके नहीं जाएगे।..अब तो बच्चे को भेजेंगे न ?'
      'हाँ क्यों नहीं  भेजेंगे ?'
       आज के हालात देख कर नागेश की मम्मी की समझ में आ गया था कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सिर्फ ट्रैफिक पुलिस पर निर्भर नहीं होना चाहिए। हम माता-पिता को भी अपनी भूमिका निभानी होगी।...हम निश्चित रूप से आटो वालों द्वारा अधिक बच्चों को ले जाने पर रोक लगा सकते हैं किंतु इसके लिए हर माता-पिता को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। 

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-पवित्रा अग्रवाल
 

1 टिप्पणी:

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