शनिवार, 8 सितंबर 2012

सबक

बाल कहानी  
 
                                             सबक
                                                                                   पवित्रा  अग्रवाल   
            
         नयना ने अपनी छोटी बहन से पूछा -- "मीनू आज अभी तक लता नहीं आई ? आए तो कहना पहले मेरा कमरा साफ कर देगी।' आज नयना अपनी आदत के अनुसार लता को लँगड़ी नहीं बोल पाई।
        लता चौदह वर्ष की लड़की है, जो नयना के यहाँ झाड़ू-पोंछा और बर्तन माजने का काम करती है। गाँव की है। बचपन में माँ-बाप ने उसे पोलियो की दवा नहीं दिलवाई थी। उसकी सजा उस बच्ची को भोगनी पड़ रही थी। तीन साल की उम्र में उसे पोलियो हो गया था। देखने में बहुत सुंदर है लेकिन लँगड़ा कर चलती है। सात क्लास तक पढ़ी भी है। क्लास में लड़कियाँ लँगड़ी कह कर उसका मजाक उड़ाती थीं। दुखी होकर उसने स्कूल छोड़ दिया और अपनी माँ के साथ घरों पर काम करने लगी।
         पता नहीं नयना मन ही मन उससे क्यों चिढ़ती है। नयना देखने में लता जितनी सुंदर नहीं है। जब भी कोई लता की तारीफ करता है तो नयना को लगता है कि उससे तुलना की जा रही है। शायद उससे चिढ़ने की भी यही वजह है। सामने तो नहीं किंतु लता के पीछे वह उसे लँगड़ी नाम से पुकारती है। माँ ने कई बार टोका है कि उसे नाम से पुकारो किंतु नयना नहीं मानती।
         एक दिन वह लता के पीछे-पीछे उसकी नकल उतारते हुए लँगड़ा कर चल रही थी। लता ने देख लिया। उसने कुछ कहा तो नहीं किंतु उसकी आँखों में आँसू आ गए थे। जिसे नयना की माँ ने देख लिया था। बाद में नयना को बहुत डाँटा था और चेतावनी दी थी कि "आगे से उसे लँगड़ी कहा या नकल उतारी तो लता के सामने ही सजा दूँगी।'
        तब से वह माँ के सामने तो नहीं किंतु भाई-बहनों के सामने उसे लँगड़ी ही कहती है लेकिन आज नयना ने मीनू से अकेले में भी लता के लिए लँगड़ी शब्द इस्तेमाल न करके लता कहा था। यह परिवर्तन मीनू ने भी नोट किया था।
        परसों घर के बगीचे में खेलते समय नयना का पैर मुड़ गया था। तब से वह लँगड़ा कर चल रही है। इसी वजह से वह दो दिन स्कूल भी नहीं गई थी। मीनू ने गौर किया है कि जब तक लता घर में रहती है नयना दीदी एक जगह बैठ कर पढ़ती रहती है। शायद लता के सामने लँगड़ा कर चलने में उसे शर्म आती है।
       लता के आने पर मीनू ने धीरे से कहा -- "नयना दीदी वह लँगड़ी आ गई है... पहले आपका कमरा साफ करने को कह दूँ ?'
       " खबरदार, उसे लँगड़ी कहा तो...
        "लेकिन दीदी आप तो रोज उसे लँगड़ी कहती हो। एक दिन मैंने कह दिया तो डाँट रही हो।'
 नयना की आँखों में अश्रु छलक आए -- "हाँ मीनू वह मेरी गलती थी शायद मुझे सबक सिखाने के लिए ही मेरे पैर में मोच आई है। उसका दुख अब मेरी समझ में आया है। अब ऐसी गलती मैं कभी नहीं करूँगी।'
                                                          

-पवित्रा अग्रवाल

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