बुधवार, 1 अगस्त 2012

सीटी का कमाल

बाल कहानी                                     सीटी का कमाल      
                                                                           पवित्रा अग्रवाल

           रजत और रीना की परीक्षा समाप्त हुए दस दिन बीत चुके थे। रजत ने आठवें की व रीना ने सातवीं की परीक्षा दी थी। दोनों ही सोच रहे थे कि इतनी लंबी छुट्टियाँ कैसे बीतेंगी। तभी देहरादून से मौसा जी का फोन आ गया कि तुम दोनों छुट्टियों में देहरादून आ जाओ। मम्मी-पापा ने भी उन्हें मौसी के पास जाने की स्वीकृति  दे दी थी। दोनों ही बहुत उत्साहित थे।
          वैसे तो मौसी कामकाजी महिला है। वह टीचर है। गर्मी की छुट्टियाँ हो जाने की वजह से उनकी भी छुट्टियाँ थीं। मौसी के एक ही बेटी है जो रजत, रीना से भी छोटी है। मम्मी पापा ने रजत और रीना को नए कपड़े दिलवाए। मौसी-मौसा जी व उनकी बेटी के लिए गिफ्ट लाकर दिए ।
         उन्हें देहरादून छोड़ने के लिए पापा जाने वाले थे किंतु मौसा जी ने कहा -"बच्चों को आत्मनिर्भर बनने दीजिए। उन्हें वहाँ से ट्रेन के ए.सी. कोच में  आप बैठा दें यहाँ स्टेशन पर हम ले लेंगे।...इस तरह बच्चों में आत्मविश्वास  बढ़ता है। लेने के लिए आप दोनों यहाँ आ जाना। कुछ दिन रुक कर बच्चों को साथ ले जाना तो आपका भी चेन्ज हो जाएगा।'
          ए.सी. में उन्हें बड़ा मजा आया। देहरादून के स्टेशन पर मौसा जी उन्हें लेने आ गए थे। घर पहुँचते ही उन्होंने मौसी व उनकी बेटी पिंकी को घर के बाहर बगीचे में खड़ा पाया। मौसी ने उन दोनों को प्यार से चिपका लिया और अंदर जाते ही उनकी पसंद की पेस्ट्री, पीजा खाने को दिए।
          इतवार के दिन मौसी-मौसाजी उन्हें मसूरी घुमाने ले गए। कैम्पटी फ़ॉल देखने के लिए सीढ़ियों से  बहुत नीचे उतरना पड़ता है। वहाँ सबने खूब मस्ती की।मौसी स्नेक्स बना कर ले गई थीं, खाने में बहुत मजा आया फिर माल रोड पर सैर की...शौपिंग की ।...रोप वे पर गए तो वे बहुत रोमांचित थे पर कुछ भयभीत भी थे कि कही ट्रॉली गिर न पड़े।फिर मौसा जी ने एक अच्छे होटल में सब को खाना खिलाया।
          इस तरह पूरा दिन वहाँ बिता कर वह सब देहरादून लौट आए। सब के साथ पिंकी भी बहुत खुश थी। देहरादून में भी उन्होंने बहुत सी जगह घूमी,  सहस्रधारा गए, रेनुका झील गए।एक दिन मौसा जी ऋषिकेश भी ले गए थे वहाँ उन्होने गंगा जी पर बना बिना पिलर का बहुत बड़ा पुल लक्ष्मण-झूला देखा फिर गंगा जी में स्नान किया।वहाँ के प्रसिद्ध चोटी वाले के यहाँ खाना खाया ...खूब मजा आया।
        एक दिन मौसी-मौसा जी को हरिद्वार अपने मित्र के यहाँ शादी में जाना था। वह उस दिन रात को ही वापस लौट आना चाहते थे लेकिन आंटी ( मौसी की सास) ने कहा, "रात को लौटने में देर हो जाएगी, समय अच्छा नहीं है। बच्चों के पास मैं तो हूँ न ? तुम लोग दूसरे दिन सुबह वहाँ से चलना। यहाँ की चिंता बिल्कुल मत करो।'
         मौसी-मौसा जी कई हिदायतें देते हुए पिंकी के साथ चले गए। रजत और रीना देर रात तक टी.वी. पर फिल्म देखते-देखते सो गए थे। बच्चों को सोया देखकर आंटी ने टी.वी. बंद कर दिया फिर उन्हें बहुत देर तक नींद नहीं आई। अचानक उन्हें ऐसा लगा कि कोई आरी से लोहे की छड़ काट रहा है। कहीं ये चोर तो नहीं हैं। उन्होंने रजत और रीना को भी उठा दिया। उनका शक पक्का हो गया था।
        रीना तो डर कर आंटी से चिपक गई। रजत बोला रीना तू डर मत, हम अभी सौ नंबर पर पुलिस को फोन कर देते हैं किंतु फोन उठाते ही पता चल गया कि फोन के वायर काट दिए गए हैं। तब तो आंटी भी परेशान हो गई बोली, "अब क्या होगा रजत...सहायता के लिए   शोर  मचाया  जाये  ?'
          "आंटी सहायता के लिए शोर मचाने से कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि यहाँ सभी घर दूर-दूर बने हुए हैं। वहाँ तक हमारी आवाज नहीं पहुँचेगी।'
           तभी रजत ने रीना से पूछा- "रीना तू अपनी सीटी लाई है ?...मैं तो अपनी घर ही छोड़ आया।...'
       "हाँ भैया मैं लाई हूँ । उसने तुरंत रजत को अपनी सीटी दे दी। रजत सोचने लगा एक और सीटी होती तो बहुत अच्छा होता। उसने पिंकी के खिलौनों में देखा तो वहाँ भी एक सीटी मिल गई। रजत ने एक सीटी रीना
को देते हुए कहा -- " रीना  तू पीछे वाले बेड रूम की खिड़की में से ये सीटी बजा।मैं बरांडे की तरफ जाकर दूसरी सीटी बजाता हूँ। दोनों ने एक साथ सीटी बजानी शुरू की तो बाहर भगदड़ सी मच गई। किसी के बोलने की आवाज आई-- "जल्दी से पीछे के रास्ते से भाग लो वर्ना पकड़े जाओगे। लगता है पुलिस आ गई है।'
         रीना दौड़ती हुई रजत के पास आई -- "भैया लगता है  चोर भाग गए।'
        आंटी ने कहा --"शाबाश बेटे तुम्हारी समझदारी काम आ गई वर्ना आज न जाने क्या होता ? सीटी की आवाज सुनकर चोर भाग गए हैं।'
        दूसरे दिन सुबह जब मौसी-मौसा जी लौटे तो उन्होंने खिड़की की एक छड़ को कटा हुआ पाया।पूरी बात जान कर दोनों ने रजत को बहुत शाबाशी दी। मौसाजी बोले --" इस समय घर में पचास हजार रुपये कैश थे, जो मुझे आज एक पार्टी को देने हैं। यदि चोर घर में घुस आते तो पता नहीं क्या होता।..मैं  पुलिस स्टेशन रिपोर्ट लिखाने जा रहा हूँ ।'
 
  
-पवित्रा अग्रवाल