सोमवार, 2 जुलाई 2012

और ठग पकड़े गए

बाल कहानी    
                               
    और ठग पकड़े गए


                                                                    पवित्रा अग्रवाल
 
 रमेश की परीक्षायें चल रही थीं।वह पढ़ाई में लगा था ।पढ़ते पढ़ते थक गया तो कुछ चहल कदमी करने अपने कमरे से बाहर निकल आया ।उसने देखा मम्मी दरवाजे पर खड़ी किसी से बात कर रही हैं।उसने खिड़की से देखा दरवाजे पर दो लोग बैठे थे और मम्मी उनसे अपने कुछ गहने साफ करवा रही थीं
 गहने चमकाने की बात सुनते ही वह कुछ चौकन्ना हो गया।उसे  याद आया कि गहने चमकाने के नाम पर महिलाओं के गहने ले कर चम्पत हो जाने की घटनाये तो रोज ही अखवारों में छपती रहती हैं।पता नहीं मम्मी अखवार नहीं पढ़तीं क्या जो इस तरह लुटने को तैयार हैं।वह सोच में पड़ गया कि क्या किया जाए... यदि दरवाजे पर जाएगा तो उन लोगों को पता चल जाएगा कि मम्मी घर पर अकेली नहीं हैं क्योंकि यह ठग लोग तभी आते हैं जब घर के पुरुष काम पर और बच्चे स्कूल गए होते हैं ।
 कुछ सोच कर रमेश पीछे के दरवाजे से घर के बाहर चला गया और दूर एक पेड़ के नीचे खड़े हो कर अपने घर पर नजर रखने लगा।उसने देखा मम्मी गहने उनके पास छोड़ कर अंदर गई हैं।गई क्या हैं उन दोनो ने ही किसी बहाने से कुछ लाने के लिये अंदर भेजा होगा।
 तभी रमेश ने देखा वह दोनो घर का दरवाजा बाहर से बंद कर के तेजी से वहाँ से जाने लगे।रमेश ने सैलफोन से फोन कर के अपने दो मित्रों को भी वहाँ बुला लिया था ।रमेश और उसके दोस्तों  ने भाग  कर उनको पकड़ लिया ।राह चलते लोग भी वहाँ इकट्ठे हो  गये ओर उनकी पिटाई करने लगे।
 बाहर से दरवाजा बंद देख कर मम्मी भी पीछे के दरवाजे से दौड़ती ,हाँफती बाहर आई। रमेश और उसके दोस्तों को वहाँ देख कर उन्हें थोड़ा चैन मिला वह बोली           ---" बेटा पहले इनके सामान की तलाशी लो ,यह मेरे गहने ले कर भागे हैं।'
 तलाशी लेने पर मम्मी के गहने एक की जेब से निकल आये।लोग उनकी फिर लात घूसों से पिटाई करने लगे।
 रमेश बोला-" हमें कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिये, इनको पुलिस के हवाले कर देते हैं'
 वह दोनो ठग  हाथ पैर जोड़ने लगे   -- "नही नही हमें पुलिस के हवाले मत करो,हमने आज पहली बार यह अपराध किया है ।'
 तभी भीड़ देख कर डंडा फटकारते दो पुलिस के जवान वहाँ आ गये -"अरे यहाँ भीड़ क्यो लगा रखी है ?'
 रमेश की पूरी बात सुन कर सिपाही ने उन दोनो ठगों को अपनी गिरफ्त में ले कर कहा --" शाबाश बेटा तुमने बहुत अच्छा काम किया है। अब इनको तो सजा मिलेगी ही पर ये हमारी माताएं , बहने कब समझेंगी ? हम अक्सर महिलाओं  को इन चोर - लुटेरो से सावधान रहने  की अपील समाचार पत्रों के माघ्यम से करते रहते हैं पर फिर भी यह लुटती रहती हैं और हमें दोष दिया जाता है कि पुलिस कुछ नहीं करती ।...बहन जी देखो आपका बच्चा कितना होशियार है... आप भी थोड़ा अखवार आदि पढ़ा करो ।' 
     
      

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