गुरुवार, 1 मार्च 2012

स्नेह पर्व होली

बाल कहानी                                                  
                         स्नेह पर्व होली
                                                                         
                                                                   पवित्रा अग्रवाल
         शाम के चार बज चुके थे। बाहर होली का हुड़दंग शांत हो चुका था। छोटे-बड़े सभी नए-नए कपड़ों में घूमते व एक-दूसरे से हाथ मिलाते नजर आ रहे थे। सब एक-दूसरे के घर होली मिलने जा रहे थे किंतु महेश के यहाँ उसका कोई भी दोस्त अभी तक नहीं आया था। लगता है रामू, राजू, सोनू, महेंद्र, हरीश सब आज उससे नाराज हो गए हैं। नाराज शायद इसलिए हो गए हैं क्योंकि आज वह उनके बहुत आग्रह पर भी उनके साथ होली खेलने बाहर नहीं गया था।
     पिछली होली की याद आते ही वह परेशान हो उठा। पिछली बार भी उसके सभी दोस्तों ने उस से वायदा किया था कि वे सीधे-साधे ढंग से रंगों द्वारा होली खेलेंगे। आँख मुँह में रंग नहीं डालेंगे। वार्निश भी नहीं लगाएँगे। उनके आग्रह पर वह न चाहते हुए भी साथ चला गया था। साथ ही यह भी याद दिला दिया था कि "किसी ने वार्निश या पेन्ट लगाया या मुँह में रंग भरा तो अगली साल वह होली बिल्कुल नहीं खेलेगा।"
       जो दोस्त उसे बुलाने आए थे, उन्होंने अपना वायदा निभाया भी था किंतु मोहल्ले के अन्य लड़के नहीं माने थे और उसे वार्निश से बुरी तरह पोत दिया था। यहाँ तक कि बालों में भी पेन्ट लगा दिया था। सूखा लाल रंग लेकर उसके दाँतों में पेस्ट की तरह मल दिया था। उसके दोस्त मोहल्ले के उन लड़कों से झगड़ने को तैयार हो गए  लेकिन महेश ने उन्हें रोक दिया था। वह नहीं चाहता था कि उल्लास का ये पर्व किसी लड़ाई-झगड़े को जन्म दे किंतु उसने मन ही मन फैसला कर लिया था कि अगले वर्ष वह होली नहीं खेलेगा।
      घर आकर पेन्ट छुटाने में उसे दो घंटे लग गए थे। मम्मी ने मिट्टी के तेल से बाल व हाथ-पाँव का पेन्ट साफ किया था। मम्मी को किसी भी तेज गंध से एलर्जी है। उनकी वजह से घर में अगरबत्ती का इस्तेमाल भी नहीं होता। मिट्टी के तेल की गंध से मम्मी की नाक से पानी बहना शुरू हो गया। दमे की मरीज मम्मी का दमा फिर उखड़ आया था और फिर उन्हें ठीक होने मे बहुत दिन लग गए थे। बस इन्हीं सब परेशानियों से बचने के लिए उसने अपने दोस्तों को नाराज कर लिया था।
       शाम को महेश नए कपड़े पहन कर तैयार हुआ। माता-पिता से आशीर्वाद लिया और अपने दोस्तों के घर की तरफ चल दिया।
         पहले वह सोनू के घर गया। वहीं रामू भी मिल गया। सोनू के सिर पर पट्टी बँधी थी सोनू ने उससे हाथ मिलाया और बोला -- "अच्छा हुआ महेश तुम होली खेलने नहीं आए। आज एक लड़के रघु से हमारा झगड़ा हो गया था। रघु ने चुपके से मेरे सिर पर पेन्ट डाल दिया था। रामू, राजू ने देखा तो उन्होंने पकड़ कर उसे पीछे धक्का दे दिया। पीछे कंकड़ों पर गिरने की वजह से उसके हाथ-पैर छिल गए थे। उसने वहीं से पत्थर उठा कर हमारी तरफ फेंका जो मेरे माथे पर लगा। माथे से खून बहने लगा।.. सामने ही डॉक्टर साहब का दवाखाना था। उनके कंपाउंडर ने मुझे दवा लगा कर पट्टी बाँध दी।
        बाद में रघु और मेरे पापा आ गए थे। उसके पापा ने रघु को पेन्ट से होली खेलने के लिए खूब डाँटा । मेरे पापा ने भी हम सबको समझाया कि यह स्नेह पर्व आपस में प्यार बढ़ाने के लिए होता है, दुश्मनी बढ़ाने के लिए नहीं।'
       अभी वह बात कर ही रहे थे कि वही लड़का रघु भी आ गया और अपनी गलती के लिए क्षमा माँगी। दोनों गले मिले। तभी सोनू की मम्मी गुजिया, नमकीन और मिठाई ले आई थीं। सभी मिल कर खाने लगे।
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-पवित्रा अग्रवाल

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