गुरुवार, 5 जनवरी 2012

दो कौड़ी की पतंग

 बाल कहानी   
                                  
   दो कौड़ी की पतंग                                                                                                       
                                                                              पवित्रा  अग्रवाल
 
 शशांक ने अपने मित्र रवि से पूछा--"रवि कल से स्कूल बंद हैं इन छुट्टियों में क्या करेगा ?'
 "करना क्या है दोस्त दिन में पढ़ाई करूँगा ,कुछ समय कंप्यूटर पर बैठूंगा और शाम को छत पर जाकर पतंग उड़ाऊँगा ।'
 "तुझे पतंग उड़ानी आती है ?'
 "हाँ ,तुझे नही आती ?'
 शशांक ने उदास स्वर में कहा --"नहीं ।'
 "अरे इसमें उदास होने की क्या बात है,नहीं आती तो मैं सिखा दूँगा।मुझे पतंग उड़ाने में बहुत मजा आता है और उस से ज्यादा मजा पतंग काट कर "वो काटा' कह कर शोर मचाने में आता है ।वैसे पतंग लूटने में भी बहुत मजा आता है...पर लूटता नहीं तूने कभी पतंग लूटी है ?'
 "नहीं '
 "इन छुट्टियों में शाम को तू रोज मेरे घर आ जाया कर ,अपन मिल कर पतंग उड़ायेगे ?'
 "मेरी मम्मी को पतंगों से नफरत हैं,वह मुझे पतंग उड़ाने की परमीशन कभी नहीं देंगी ।'
 "उन्हें पतंग उड़ाना पसन्द क्यों नही है, तेरे पापा को भी पतंग पसन्द नहीं है ? ...संक्रान्ति के दिन तो मेरे मम्मी पापा भी मेरे साथ पतंग उड़ाते हैं ।'
 "पतंग तो मेरे पापा को भी उड़ानी आती है,पहले वह उड़ाते भी थे,पर जब से वो हादसा हुआ है तब से पापा ने पतंग उड़ानी छोड़ दी और मम्मी तो पतंग नाम से ही बिदकती हैं।'
 "क्या हादसा हो  गया था शशांक ?'
 "बहुत दिन पहले की बात है,मेरा एक भाई था,उसे पापा ने ही पतंग उड़ानी सिखाई थी ।वह कभी कभी अपने दोस्तो के साथ छत पर पतंग उड़ाता था ।जब भी वह छत पर जाता था मम्मी हर बार उसे सावधानी से पतंग उड़ाने और पतंग न लूटने की सलाह अवश्य देती थीं फिर बड़बड़ाना शुरू का देती थीं कि रोज अखवार में खबर आती है पर बच्चे दो कौड़ी की पतंग लूटने के लिये ऐसे पागल हो जाते हैं कि जान गवा बैठते हैं या हाथ पैर तुड़वा लेते हैं ।'तब पापा अक्सर मम्मी को डांट देते थे कि तुम हमेशा नेगेटिव ही क्यो सोचती हो,हादसे कहाँ नहीं होते,उन से डर कर घर में तो नहीं बैठा जाता ।..तुम ने उसे इतनी बार समझा तो दिया है बच्चे पर विश्वास  करना भी सीखो।'
 "फिर क्या हुआ ?'
 "होना क्या था एक दिन भाई अपने दोस्तो के साथ छत पर पतंग उड़ा रहा था ,पापा की छुट्टी  थी तो पापा भी ऊपर ही थे ,पापा किसी काम से नीचे आए थे। भाई के दोस्त ने कटी पतंग को लोहे की रॉड से पकड़ने की कोशिश की तो रॉड हाइटेंशन वायर से छू गई,दोस्त को बचाने के चक्कर में भाई भी उसकी चपेट में आ गया , इस तरह दोनो की मौत हो गई ।''
 "ओ माई गाड,यह तो बहुत बुरा हुआ । ''
 "उस दिन के बाद से छत पर ताला पड़ा है। पापा भी कहीं खुद को दोषी मानते हैं और मैंने कभी पतंग उड़ाने की जिद्द नहीं की ।'
 "वह तो एक हादसा था यार ,पापा खुद को दोषी क्यों मानते हैं ?   देश में हजारों लोग पतंग उड़ाते हैं उनमें से कुछ के साथ इस तरह के हादसे हो जाते हैं।दुर्घटनाए कहाँ नहीं होती ट्रेन,एरोप्लेन एक्सीडेंट नहीं होते क्या ....तो क्या लोग इनमें यात्रा करना छोड़ देते हैं ।चल मैं तेरी मम्मी से प्रार्थना करता हूँ कि तुझे मेरे साथ पतंग उड़ाने की परमीशन दे दें ।'
 "कोशिश करना व्यर्थ है रवि वह बिल्कुल नहीं मानेंगी ।'
 "शशांक,रवि तुम दोनो में क्या खिचड़ी पक रही है ?'--मम्मी की आवाज सुन कर दोनो सकपका गए।
 "कुछ नहीं मम्मी,बस ऐसे ही बात कर रहे थे ।'
 "किस से किस बात की परमीशन लेने की बात हो रही थी ?'
 "आन्टी मैं आपसे शशांक को अपने घर लेजाने की रिक्वेस्ट करना चाह रहा था पर वह कह रहा था आप नहीं मानेंगी ।'
 "तुम्हारे घर तो यह रोज जाता है ,आज परमीशन की जरूरत क्यों पड़ रही है,कोई खास बात है ?'
 "असल में आन्टी कल से स्कूल बन्द हैं,मैं शशांक से कह रहा था शाम को मेरे घर आजाना मिल कर पतंग उड़ायेंगे ।'
 मम्मी का चेहरा एकदम से कठोर हो गया फिर आँखें नम होगई --"-नहीं बेटा इस पतंग ने मुझसे मेरा बेटा छीना है, मुझे नफरत हो गई है पतंग से ।'  
 "हाँ आन्टी शशांक ने मुझे बताया था,बहुद दुखद हादसा था वो।   ..पर आन्टी मेरी छत बहुत सुरक्षित  है वहाँ किसी तरह का कोई खतरा नहीं है ,मम्मी पापा ने इसी शर्त पर परमीशन दी है कि मैं केवल पतंग उड़ाऊगा ,कटी पतंग लूटूंगा नहीं ।उनकी शर्त है कि जिस दिन पतंग के पीछे भागते देख लिया उस दिन से छत की चाबी लेली जाएगी ।..
 मम्मी को चुप देख कर शशांक ने कहा--प्लीज मम्मी हाँ कर दीजिये,मेरा भी पतंग उड़ाने को बहुत दिल करता है...सच कहूँ तो मम्मी कई बार मेरा दिल किया कि आपको बिना बताये किसी दोस्त के यहाँ जा कर अपना यह शौक पूरा कर लूँ पर मैं ने ऐसा नहीं किया ।..मैं आपसे वादा करता हूँ कि बहुत सावधानी से  पतंग उड़ाऊँगा ।मम्मी मुझे भी अपनी जान की चिन्ता है मैं भी मरना या अपाहिज होना नही चाहता ।'
 "प्लीज आन्टी '
 "ठीक है चले जाना,पर अपना वादा घ्यान रखना ।'
 "थैंक यू मम्मी,दो कौड़ी की पतंग के पीछे हम कोई खतरा नहीं उठायेंगे '

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-पवित्रा अग्रवाल