सोमवार, 14 नवंबर 2011

खाने में रंग

  बाल कहानी                                                       

                          खाने में रंग

                                                                                               पवित्रा अग्रवाल


 सुयश स्कूल से घर आया तो देखा माँ रसोइ में कुछ काम का रही थीं। सुयश ने रसोई में जा कर पूछा "माँ आप इस समय रसोई में क्या कर रही हैं ?'
 "बहुत दिन से ऊपर वाली आन्टी से कह रखा था कि आप जब भी अपने लिए अचार डालने को टेंटी लाएं तो एक किलो मेरे लिए भी ले आना ।कल आन्टी ने टेंटी ला कर दी हैं ।'
 "अरे वाह माँ, टेंटी का अचार तो मुझे बहुत पसंद है।खूब सारा डालना ।'
 "मुझे मालुम है कि तुझे यह अचार बहुत पसंद है, तेरे लिए ही तो डाल रही हूँ।...तेरे पापा को तो अचार का शौक है नहीं ।'
 "थैंक यू माँ,मैं कुछ मदद करूँ ?'
 माँ ने मुस्कुरा कर कहा-- "अचार डालना सीखेगा इतने दिन से कह रही हूँ उपमा ,पोहा तुझे बहुत पसंद हैं, इन्हें  बनाना सीख ले। कभी मुझे बाहर जाना पड़े तो इन्हें बना कर पेट तो भर सकता है। "
 "उपमा ,पोहा ही क्यों माँ मुझे तो आप से पूरा खाना बनाना ही सीखना है।स्कूल बन्द हो जाने दीजिए इस बार कुछ चीजें बनाना जरूर सीखूँगा ।...आप अचार में यह क्या डाल रही हैं माँ ?'
 "बेटा यह लाल रंग है ।'
 "इस से क्या होता है माँ ?'
 "कुछ नहीं बस अचार अच्छा दिखने लगता है । '
 " इस से स्वाद में तो कोई फर्क नहीं पड़ता न ?'
 "न,इस से स्वाद में कोई फर्क नहीं पड़ता ।'
 "तो प्लीज माँ आप रंग ना डालें ।...इस तरह की चीजों से बचना चाहिए।रंग स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते हैं।बल्कि इन्हें तो धीमा जहर कहना चाहिए ।बहुत सी बीमारियों की जड़ हैं ये ।'
 "अच्छा ..ऊपर वाली आन्टी तो हर अचार में डालती हैं ।'
 "उन्हें पता नहीं होगा, इस लिए डालती हैं ।अब आप उन्हें भी बता दीजिएगा ।'
 "पर बेटा तुझे यह किसने बताया ?'
 माँ एक बार मैं अपने एक दोस्त के घर गया था ,उसके डाक्टर भाई ने यह सब बताया था । '
 "पर बेटा आज कल तो खाने पीने की चीजों  में खूब रंग डाला जा रहा है।यदि वह हानिकारक है तो सरकार को उस पर रोक लगानी चाहिए ।'
 "आप बिल्कुल ठीक कह रही  हैं माँ  पर इसके लिए लोगों को भी जागरूक होना पड़ेगा ।हम सारी जिम्मेंदारी सरकार पर नहीं डाल सकते ।होटल में खाना खाने जाएं तो उनसे कहें कि सब्जियों में रंग न डालें, ..हलवाई के यहाँ मिठाई लें तो देख कर वही मिठाई लें जिनमें रंग न डला हो और उसे भी कहें कि रंग का प्रयोग न करे ।'
 "लेकिन बेटा वह यह बात क्यों मानेगा ?उनकी मिठाई व सब्जियाँ तो खूब बिकती ही हैं न ।'
 "हाँ माँ ,एक दो के कहने से नहीं पर जब लोगों में जागरूकता आजाएगी और वह उन्हें रंग न डालने की हिदायत देंगे ,साथ ही रंग वाली मिठाई ,सब्जियां आदि नहीं लेंगे तो वह इस बात पर सोचने को मजबूर हो जाएगे।इस लिए पहले हम को जागरूक होना पड़ेगा ।'
 "हाँ बेटा कहता तो तू बिल्कुल ठीक है।आगे से मैं इसका घ्यान रखूंगी और अपने मिलने वालों को भी बताऊंगी।ले इस रंग को कचरे के डिब्बे में फेंक दे।'
 "थैंक यू मम्मी ।'
                                       

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