शनिवार, 24 सितंबर 2011

फूलों से प्यार

बाल कहानी


                                                          फूलों से प्यार

                                                                                                  पवित्रा अग्रवाल


 मम्मी ने गुस्से में दो थप्पड़ मारते हुए ऋतु से कहा --"तू क्यों नहीं मानती,तेरी वजह से रोज मुझे पड़ौसियों की बातें सुननी पड़ती हैं ।तू उनके गमलों से फूल क्यों तोड़ती है ? रोज कोई न कोई तेरी शिकायत करता रहता है।'
  रोते हुये ऋतु ने कहा "पर आज तो मैं ने किसी के फूल नही तोड़े, आप मुझे बिना बात मार रहीं हैं।'
 "आज नही तो कल तोड़े होंगे,नेहा की मम्मी आज मुझे लिफ्ट में मिली थीं तो शिकायत कर रही थीं।'
 " मैं ने कल सीमा के पौधे से दो फूल जरूर तोड़े थे पर नेहा के गमले से कोई फूल नहीं तोड़ा था'
 "सीमा के फूल भी क्यो तोड़े ?'
 "मम्मी मैं क्या करूँ, मुझे फूल बहुत अच्छे लगते हैं,न चाहते हुये भी मैं फूल तोड़ लेती हूँ।'
 माँ ने उसे समझाते हुए कहा --"अच्छे लगते हैं तो उन्हे तोड़ती क्यों है,तोड़ने के बाद तो वह और जल्दी सूख जाते हैं।पौधो पर लगे हुए फूल ज्यादा समय तक खिले रहते हैं और उनसे सब को खुशी मिलती है।उन्हे खिला देख कर सब के साथ तू भी खुश हो लिया कर।'
 ऋतु तुरन्त बोली--"मम्मी मैं नहीं तोड़ूँगी तो भी फूलों को तो सूख कर गिरना ही है।'
 ऋतु के इस प्रश्न से माँ नाराज हो गई --"बात समझती नहीं बस बहस करती है।सौ बात की एक बात समझले जो चीज तुम्हारी नही है उस को छूने का तुम्हे कोई हक नहीं है।आज के बाद तूने किसी का एक भी फूल तोड़ा तो मैं तुझे न कहीं घुमाने ले जाऊँगी,न एक भी ड्रेस दिलाऊँगी और सब से कह दूँगी कि मुझ से शिकायत मत करो उसे सजा दो।'
  ऋतु क्षमा मांगते हुए बोली--"अच्छा मम्मी मैं वादा करती हूँ आगे से नहीं तोड़ूगी पर फिर भी किसी ने मेरा झूठा नाम लगाया तो ? जैसे नेहा की मम्मी ने आप से झूठ कहा।' 
 ऋतु के वादे के बाद भी माँ की नाराजगी कम नहीं हुई थी --"उन्हों ने सामान्य बात कही थीं कि ऋतु पौधों पर एक फूल नहीं छोड़ती है वैसे भी तू तोड़े या न तोड़े पर फूल तोड़ने के लिए इस बिÏल्डग में तू इतनी बदनाम हो चुकी है कि फूल कोई और भी तोड़े तेरा ही नाम लिया जाएगा।'
 "मैं नही तोड़ू तब भी मेरा नाम लिया जाये यह तो गलत बात है मम्मी।'
 "अब गलत हो या सही पर सच्चाई यही है।'
  ऋतु स्कूल से लौटी तो अपने दरवाजे पर चार पाँच तरह के रंग बिरंगे फूलों के गमले देख कर चहकते हुए मम्मी से पूछा--"यह सब आप मेरे लिए लाई हैं ?'
 "हाँ '
 "थैंक यू मम्मी आप बहुत अच्छी हैं। ' थोड़ी ही देर मे उसके फूलों से लदे गमले देखने बहुत से बच्चे आ गए।
 आश्चर्य से एक बच्चा बोला - "अरे ऋतु अभी तक तू ने एक भी फूल नहीं तोड़ा ?तोड़ न..तू कहे तो हम तोड़ कर दे दें ?'
 "दूर हटो कोई मेरे फूलों को हाथ नहीं लगाएगा।'
 "कल तक तुम हमारे फूल तोड़ती थीं, अब हम भी तुम्हारे फूल नहीं छोड़ेगे।' कह कर सब बच्चे चले गये।

 अब ऋतु डर गई थी।न उसका खाने मे मन लग रहा था न पढ़ने में।वह बार बार खिड़की से झांक
कर देख लेती थी कि फूल अभी हैं या किसी ने तोड़ लिये।रात को उसने मम्मी से पूछा--"क्या हम इन गमलो को घर में नही रख सकते ?'
 माँ ने उसे दुलारते हुये कहा - "बेटा इन को हवा और धूप की आवश्यकता पड़ती है तभी तो यह जीवित रह पायेंगे ।'
 डरते हुए ऋतु बोली --"मम्मी बाहर किसी ने फूल तोड़ लिये तो ?'
 "तोड़ लेने पर भी तू किसी से शिकायत नहीं कर सकेगी..पर अभी तक तूने अपने गमले का एक भी फूल नहीं तोड़ा। जा तोड़ ले.. ये तेरे अपने हैं, तुझे कोई नहीं डाँटेगा... वैसे भी कल तक गिर कर मुरझा जाएगे।'
 "नहीं मम्मी ये गैंदे के फूल तो दस-पंद्रह दिन तक खिले रहते है और ये दूसरे वाले फूल भी कई दिन नहीं मुरझाते। दूसरों की तकलीफ का अहसास मुझे आज तब हुआ है जब मेरे पास अपने फूल हैं।..मैं सब बच्चो से क्षमा माँग लूँगी और कभी किसी के फूल नहीं तोड़ूँगी। उनसे कहूँगी कि वह भी मेरे फूल न तोड़े।'  

         
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