शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

जन्म दिन का उपहार

बाल कहानी                                  
                                            जन्म दिन का उपहार

                                                                                                             पवित्रा अग्रवाल
             
      फिस से आते ही पापा ने कहा "टीना तुम्हारा जन्म दिन आ रहा है ..जन्म दिन के लिए क्या क्या तैयारी करनी है ?..तुम्हारी कितनी सहेलियाँ आएंगी ?..बाजार से मुझे क्या क्या लाना है...मम्मी से सलाह कर के लिस्ट तैयार कर लो,जन्म दिन से दो दिन पहले मुझे दे देना ।''
  "पापा मैं इस बार अपना जन्म दिन नहीं मनाऊँगी।''
 "जन्म दिन नहीं मनाओगी , क्यों ?...हर वर्ष तो बीस दिन पहले से शोर मचाना शुरू कर देती थी,इस बार क्या हो गया ?''
 "उन दिनो मेरी परीक्षाएं हैं, कोई भी सहेली नहीं आ पाएगी।''
 "अरे यह तो बड़ी गड़बड़ हो गई,चलो परीक्षा के बाद एक दिन अपनी दोस्तों को बुला कर वैसे ही पार्टी दे देना।...अब यह तो बता कि इस बार मेरी बिटिया अपने पापा से क्या उपहार लेगी ?''
 " पापा इस बार मुझे कोई उपहार नहीं चाहिए ।''
 " क्या तुम को इस बार जन्म दिन का उपहार भी नहीं चाहिए,आश्चर्य है ।...क्या हमारी बेटी अपने पापा से नाराज है ?''
 " नहीं पापा नाराज नहीं हूँ ,सब कुछ तो है मेरे पास ।''
 " फिर भी कुछ तो ले ले।''
 " मैं जो माँगूगी मुझे मिलेगा पापा ?''
 " माँग कर तो देख क्यों नहीं मिलेगा ।''
 " मै जानती हूँ जो मैं माँगूगी वह आप मुझे नहीं दे पाएंगे ।''
 " ऐसा क्या है जो मैं नहीं दे पाऊँगा , जो उपहार तुम चाहती हो क्या वह बहुत मंहगा है ?''
 " मंहगा तो नहीं है बल्कि उस उपहार को देने में रुपए भी खर्च नहीं करने पड़ेगे फिर भी आपके लिए देना मुश्किल है।''
 " ऐसा कौन सा उपहार है जो बिना पैसों के मिलता है ,पहेलियाँ मत बुझा,जल्दी से बता दे ।''
 " तो फिर सुनिए पापा, आपको मुझ से एक वादा करना होगा ।''
 " कैसा वादा ?''
 " पापा मैं आपको बहुत प्यार करती हूँ और चाहती हूँ आप हमेशा स्वस्थ रहें...जब पिछले दिनों आप की तबियत खराब हुई थी तब डाक्टर ने आप से साफ कहा था कि "मुझ से इलाज कराना है तो आपको तम्बाकू वाला पान और गुटखा छोड़ना होगा ' लेकिन आपने डाक्टर की बात नहीं मानी पर मेरे लिए आपको तम्बाकू और गुटका खाना छोड़ना होगा..और यही मेरे लिए जन्म दिन का उपहार होगा ।''
 "  अरे बेटा तू ने भी यह क्या माँग लिया।..मैं कई बार यह सब छोड़ने की कोशिश कर चुका हूँ किन्तु नहीं छोड़ पाया..कुछ और माँग ले टीना।...आज तुझे अचानक मेरा तम्बाकू और गुटखा कैसे याद आगया ?''
 ""पापा पिछले सप्ताह मेरे स्कूल की एक लड़की के पापा की मौत मुँह के कैंसर से हो गई थी, वह बहुत गुटखा खाते थे और सिगरेट भी खूब पीते थे।उनका आप्रेशन हुआ था। ...आपको पता है पापा इलाज में उनका मकान भी बिक गया फिर भी उनको बचाया नहीं जा सका...अब उस लड़की ने स्कूल छोड़ दिया है क्यों कि उसकी मम्मी उसे इतने मंहगे स्कूल में नहीं पढ़ा सकती।क्या आप चाहते हैं हमारे साथ भी ऐसा ही हो ? ''
 कह कर टीना सुबक - सुबक कर रोने लगी थी
 "पापा ने उसे सीने से चिपका लिया था --" रो मत टीना,तुम्हारे पापा के साथ ऐसा कुछ नहीं होगा। मैं तम्बाकू छोड़ने की पूरी कोशिश करूँगा ।''
 ""पापा कोशिश तो आप पहले भी कई बार कर चुके हैं पर इस बार आपको छोड़ना होगा।आप पान खाएं लेकिन बिना तंबाकू का और गुटखा तो बिलकुल नहीं।...मेरे जन्म दिन में अभी कुछ दिन बाकी है,तब तक आप छोड़ दें और यही मेरा उपहार है। उपहार देना न देना आपकी इच्छा पर है।''
 कुछ सोचते हुए पापा ने जेब में हाथ डाल कर गुटखे के कुछ पैकेट निकाल कर टीना को देते हुए कहा इन्हें डस्ट-बिन में फेंक दे...और फ्रिज में भी कुछ तंबाकू के पान रखे हैं उन्हें भी फेंक दे,जब छोड़ना ही है तो अभी से क्यों नही।''
 " थैंक यू पापा..पर अपना वादा याद तो रहेगा न ?''
 " तुम्हें अपने पापा पर विश्वास  नहीं..उपहार दे के कोई वापस लेता है क्या ?''
  टीना पापा से लिपट गई थी ।
                                                          
                                                                        

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