रविवार, 6 मार्च 2011

दो चोटी वाली


                                                                  दो चोटी वाली

                                                                                                                              पवित्रा अग्रवाल

 श्रुति ने रोते हुए घर में प्रवेश किया और सुबक कर बोली- "माँ मैं रुचि की गलती की सजा आखिर कब तक पाती रहूँगी ? '
 "क्यों आज क्या हुआ ? ...क्या किया है रुचि ने ?'
 "स्कूल की एक लड़की को ये मोटी कह कर चिढ़ाती है। मैंने इसको कई बार टोका कि ये अच्छी बात नहीं है। किसी दिन वो मारेगी।' ...आज उसकी दीदी उसे लेने आई थी। उसने मुझे दो थप्पड़ मार कर कहा-"अब मेरी बहन को मोटी कहा, तो देखना..।'
 "कितनी ही बार घर व बाहर दोनों जगह उसकी गलती की सजा मैंने पाई है, आखिर क्यों ? मेरी गलती क्या है ? यही न कि वह मेरी जुड़वाँ बहन है और हम दोनों देखने में बिल्कुल एक सी हैं। मैं अब उसके साथ नहीं पढ़ूँगी..मेरा दाखिला दूसरे स्कूल में करा दो माँ। दूसरी कक्षा में तो उसकी वजह से मेरी रेंक भी बिगड़ गई थी।'
 "रुचि की वजह से तुम्हारी रेंक कैसे चली गई थी श्रुति ?' पड़ोस में आई नई आंटी ने आँगन में प्रवेश करते हुए पूछा।
 श्रुति की मम्मी ने आंटी को बताया- "जब ये दोनों सैकंड क्लास में थीं तब इनकी मौखिक परीक्षा थी। घर आकर रुचि ने बताया कि उसकी परीक्षा दो बार हुई। श्रुति ने बताया कि उसकी तो एक बार भी नहीं हुई। असल में रुचि को ही श्रुति समझ कर टीचर ने उसकी दो बार परीक्षा ले ली थी। इन लोगों को तब इतनी समझ नहीं थी कि टीचर से जाकर कहतीं। रुचि पढ़ने में श्रुति जितनी अच्छी नहीं है अतः श्रुति के नंबर कुछ कम आए और क्लास में सैकंड आने के बदले उसकी रेंक थर्ड आई।'
 "अरे यह तो बड़ा मजेदार किस्सा है...आपने टीचर से जाकर कहा नहीं ?'
 "मैं तो कहना चाहती थी किंतु सब लोगों ने कहा कि दुविधा से बचने के लिए टीचर दोनों को अलग-अलग सेक्शन में कर देंगी। इस तरह तो दोनों बहनें अलग-अलग हो जाएँगी। दोनों का एक ही सेक्शन में रहना ठीक है।'
 "आपकी रुचि लगता है श्रुति से ज्यादा शरारती  है ?'
 "हाँ रुचि बहुत शैतान है। श्रुति शांत है। रुचि का मन पढ़ने में भी अधिक नहीं लगता लेकिन श्रुति पढ़ने में तेज है।
  "इन दोनों को पहचानने में आप से कभी गलती नहीं होती थी ?'
 "शुरू में पहचान ने में मुझसे भी कभी-कभी गलती हो जाती थी पर अब नहीं होती।'
 "पर इसका तो आपको कोई हल ढूँढ़ना होगा क्योंकि स्वास्थ्य, ऊँचाई, रंग, नैन - नक्श सभी में दोनों एक सी हैं। मुझे यहाँ आए तीन महीने हो गए, मैं अब भी यह नहीं बता सकती कि कौन सी रुचि है, कौन सी श्रुति है।'
 "इसीलिए अब श्रुति जिद्द कर रही है कि रुचि वाले स्कूल में नहीं पढ़ेगी लेकिन स्कूल तो मैं नहीं बदलवा सकती। अभी तो इसके पापा दोनों को एक साथ स्कूल छोड़ आते हैं, एक साथ ले आते हैं। कभी एक स्कूल न जा पाए तब भी कोई परेशानी नहीं है। क्या पढ़ाया, सब पता चल जाता है। छुट्टी भी एक दिन होती है। शिक्षक- अभिभावक संगोष्ठी भी एक ही दिन होती हैं। अलग-अलग स्कूल होने से परेशानियाँ बढ़ जाएँगी।'
 "ठीक है मम्मी स्कूल मत बदलवाइए.. सेक्शन भी वही रहने दीजिए। मुझे एक उपाय सूझा है। हम

दोनों के ही छोटे-छोटे बाल कटे हैं। मैं अपने बाल बढ़ा कर दो चोटियाँ किया करूँगी। जब तक मेरे बाल छोटे हैं, आप रबर बैंड लगाकर मेरी दो चोटी कर दिया करिए। बालों से हमारी पहचान बन जाएगी फिर मैं दो चोटी वाली कहलाऊँगी..बोलिए मंजूर है ?'
 "हाँ श्रुति तुम्हारा ये सुझाव बहुत अच्छा है, मुझे मंजूर है।'
 श्रुति ने चहकते हुए रुचि से कहा-" अब अपनी शरारतों की सजा स्वयं ही भुगतना...मेरा पीछा छूटा।'  फिर मम्मी के हाथ में कंघा देते हुए श्रुति ने कहा, "मम्मी मुझे आज से ही दो चोटी वाली बना दो न...।'

-पवित्रा अग्रवाल