रविवार, 13 फ़रवरी 2011

छाले अब नहीं

                                                              छाले अब नहीं
                                                                                         
                                                                                                           पवित्रा अग्रवाल

 दीपू के मुँह में फिर छाले निकल आए थे। तीन दिन से वह ढंग से खाना भी नहीं खा पा रहा। डॉक्टर के पास जाने से अब उसे डर लगता है।
 पहले जब छाले होते थे तो डॉक्टर खाने की गोलियाँ लिख देते थे। बी-कॉम्पलैक्स की उन गोलियों से उसके छाले ठीक भी हो जाते थे। गोलियों से जब कोई फायदा नहीं हुआ तो डॉक्टर ने हर बार यही कहा कि "बेटा, आपको साग-सब्जी खूब खानी चाहिए। तुम्हारी मम्मी कह रही थीं कि तुम कोई सब्जी नहीं खाते हो। यही आपके छालों का कारण है... छाले बार-बार होते रहेंगे। सुई कब तक लगवाते रहोगे ? जल्दी-जल्दी छाले होना अच्छी बात नहीं है। इससे मुँह में कैंसर भी हो सकता है।'
 जब डॉक्टर समझाते तो सात-आठ दिन वह खूब सब्ज़ियाँ खाता था। छाले ठीक होते ही फिर वह डॉक्टर की हिदायत भूल जाता था।
 माँ रोज गुस्सा होती हैं -" दोनों टाइम दाल-चावल खाना चाहता है। सब्जी तो खाना ही नहीं चाहता। रोटी-पराठे खाता है तो वह भी अचार के साथ। इस बार मैं तेरे साथ डॉक्टर के पास नहीं जाऊँगी। अकेला जा और सुई लगवा कर आ।'
 डॉक्टर के पास जाने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी। पहले तो वह डाँटेंगे कि सब्ज़ियाँ खानी क्यों छोड़ दीं ? दूसरी बात फिर इंजेक्शन लगाने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। जिससे उसे बहुत डर लगता है। तीन दिन और इसी तरह निकल गए। छाले बढ़ते ही जा रहे थे। मम्मी उसके आग्रह पर हरी सब्जी भी बना रही थीं किंतु छालों की वजह से वह कुछ नहीं खा पा रहा था। मम्मी इस बार बहुत सख्त हो गई थीं। डॉक्टर के पास उसके साथ जाने को तैयार नहीं थीं। उसका मन रोने को करता  किंतु रो भी नहीं पाता था, क्योंकि छोटी बहन उसे चिढ़ाती थी कि "भैया लड़का होकर रोता है।"
   आखिर उसने माँ से प्रार्थना की - "मम्मी, इस बार आप मेरे साथ डॉक्टर के पास चलो। मैं वायदा करता हूँ आप जो भी सब्जी बनाएँगी रोज दोनों टाइम खाया करूँगा। बस आप एक काम करना जब मैं सब्जी नहीं खा रहा होऊँ तो आप मुझे छालों की याद दिला देना।'
 फिर माँ उसे डॉक्टर के पास ले गई। उसने डॉक्टर से भी पक्का वायदा किया कि "अब मैं रोज सब्जी खाया करूंगा ।' डॉक्टर के इलाज से छाले ठीक हो गए।
 अब कई महीनों से उसे छाले नहीं हुए हैं। वह रोज सब्जी खाता है। वह समझ गया है कि दवाएँ खाने व इंजेक्शन लगवाने से अच्छा सब्ज़ियाँ खाना है। कभी वह सब्जी खाने में आनाकानी करता है तो मम्मी याद दिला देती है। मम्मी से पहले नटखट नन्हीं बहन जूही याद दिला देती है, "भैया, सब्जी नहीं खाओगे तो छाले हो जाएँगे। फिर आप सुई लगवाने में रोएँगे।'
 अब सब्जी खाने की उसकी आदत पड़ गई है। बहुत दिनों से वह डॉक्टर के पास  नहीं गया है।
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13 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर और शिक्षाप्रद कहानी| धन्यवाद|

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  2. इस बात में कोई भी दो राय नहीं है कि लिखना बहुत ही अच्छी आदत है, इसलिये ब्लॉग पर लिखना सराहनीय कार्य है| इससे हम अपने विचारों को हर एक की पहुँच के लिये प्रस्तुत कर देते हैं| विचारों का सही महत्व तब ही है, जबकि वे किसी भी रूप में समाज के सभी वर्गों के लोगों के बीच पहुँच सकें| इस कार्य में योगदान करने के लिये मेरी ओर से आभार और साधुवाद स्वीकार करें|

    अनेक दिनों की व्यस्ततम जीवनचर्या के चलते आपके ब्लॉग नहीं देख सका| आज फुर्सत मिली है, तब जबकि 14 फरवरी, 2011 की तारीख बदलने वाली है| आज के दिन विशेषकर युवा लोग ‘‘वैलेण्टाइन-डे’’ मनाकर ‘प्यार’ जैसी पवित्र अनुभूति को प्रकट करने का साहस जुटाते हैं और अपने प्रेमी/प्रेमिका को प्यार भरा उपहार देते हैं| आप सबके लिये दो लाइनें मेरी ओर से, पढिये और आनन्द लीजिये -

    वैलेण्टाइन-डे पर होश खो बैठा मैं तुझको देखकर!
    बता क्या दूँ तौफा तुझे, अच्छा नहीं लगता कुछ तुझे देखकर!!

    शुभाकॉंक्षी|
    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’
    सम्पादक (जयपुर से प्रकाशित हिन्दी पाक्षिक समाचार-पत्र ‘प्रेसपालिका’) एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
    (देश के सत्रह राज्यों में सेवारत और 1994 से दिल्ली से पंजीबद्ध राष्ट्रीय संगठन, जिसमें 4650 से अधिक आजीवन कार्यकर्ता सेवारत हैं)
    फोन : 0141-2222225(सायं सात से आठ बजे के बीच)
    मोबाइल : 098285-02666

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  3. ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है.

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  4. ब्लॉग की दुनिया में आपका स्वागत, उत्तरप्रदेश ब्लोगेर असोसिएसन uttarpradeshblogerassociation.blogspot.com ब्लोगेरो की एक बड़ी संस्था बन रही है. आप इसके प्रशंसक बनकर हमारा उत्साह वर्धन करें. ब्लॉग पर पहुँचने के लिए यहाँ क्लीक करें. इस सामुदायिक चिट्ठे पर लेखक बनने के लिए अपना मेल आईडी इस पते पर भेंजे, indianbloger@gamil.com , इसके बाद आपको एक निमंत्रण मिलेगा और उसे स्वीकार करते ही आप इसके लेखक बन जायेंगे.


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  5. ब्लॉग की दुनिया में स्वागत है.
    पहली ही पोस्ट बहुत ही अच्छी और शिक्षाप्रद लिखी है.
    बधाई.
    'मिलिए रेखाओं के अप्रतिम जादूगर से '

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  6. वैलेण्टाइन-डे पर होश खो बैठा मैं तुझको देखकर!
    बता क्या दूँ तौफा तुझे, अच्छा नहीं लगता कुछ तुझे देखकर!!

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  7. अच्छी शुरुआत।
    शोभनम्।
    स्वागत है आपका
    आइये हिन्दी
    एवं हिन्दी ब्लॉग जगत् को सुशोभित कीजिये
    इसे समृद्ध बनाइये।

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  8. इस सुंदर से चिट्ठे के साथ आपका हिंदी चिट्ठा जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  9. अच्छी कहानी.

    हिन्दी चिट्ठा जगत में आपका स्वागत है । बलाग जगत में निरन्तर उन्नति के लिये नजरिया ब्लाग पर "नए ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव" अवश्य पढें । शुभकामनाओं सहित...
    http://najariya.blogspot.com/

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  10. i like your stories. i am also a teacher and use your stories in my school.

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  11. धन्यवाद विजय पंडित जी ,आप को मेरी कहानियां पसंद आई जान कर हर्ष हुआ .आप एक शिक्षक है और मेरी कहानिया स्कूल के बच्चों के लिए स्तेमाल कर रहे हैं इस काम के लिए आप का नमन ,मेरी कहानियां अधिक से अधिक बच्चों ता पहुंचे यही तो मेरी चाहत है ..और यही मेरी इच्छा है .

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